पैदा होते ही जिंदा गाड़ दिया था जिसे वह बनी अन्तरराष्ट्रीय लोक नृत्यांगना

0
173

अजमेर। राजस्थान की लोक नृत्यांगना गुलाबो सपेरा गुलाबो के बचपन की बातें आप नहीं जानते होंगे। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उनके बचपन की दिल दहला देने वाली घटना, जिसे सुनकर आपकेआंसूं निकल पड़ेंगे। जी हाँ ! गुलाबो का जन्म 1960 में राजस्थान के अजमेर जिले के कोटड़ा गांव में हुआ था। यह वही वक्त था जब राजस्थान के कई हिस्सों में बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था। क्योंकि उन्हें अभिशाप समझा जाता था।

गुलाबो सपेरा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जिसका जिक्र उन्होंने ‘बिग बॉस 5’ में किया था। उस सीजन में गुलाबो बतौर कंटेस्टेंट शामिल हुई थीं और अपनी दुखभरी जिंदगी का किस्सा सुनाया था। गुलाबो सपेरा ने बताया था कि जब उनका जन्म हुआ तो पिता घर से दूर थे। रिश्तेदारों और वहां मौजूद लोगों ने जब देखा कि बेटी पैदा हुई है तो उन्होंने ले जाकर जमीन में जिंदा दफना दिया। इस बारे में तब गुलाबो के मां-बाप को पता नहीं था। जन्म के बाद होश आने पर जब गुलाबो की मां को मालूम हुआ कि बेटी पैदा हुई थी और उसे जमीन में गाड़ दिया है तो वह रोने लगीं।

तब उन्होंने सब लोगों से मिन्नतें कीं कि उन्हें उस जगह का पता बता दें जहां गुलाबो को दफनाया है। वह देखना चाहती हैं पर कोई नहीं माना। गुलाबो ने बताया था कि उनकी मौसी को इस बात की जानकारी थी कि गुलाबो कहां दफन हैं और बस वह उनकी मां को उस जगह पर ले गईं। तब मां और मौसी ने मिलकर गुलाबो को जमीन खोदकर बाहर निकाला। देखा तो उसकी सांसें चल रही थीं।

दरअसल गुलाबो घुमंतू समुदाय से हैं और उस समुदाय में लड़कियों का पैदा होना अच्छी बात नहीं मानी जाती। ‘बीबीसी’ को दिए एक इंटरव्यू में गुलाबो सपेरा ने कहा था, ‘घुमंतू समुदाय के हैं तो वहां लड़की पैदा होना अच्छी बात नहीं मानी जाती। उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता, पालने से लेकर शादी में खर्चा, यह सब फालतू माना जाता है। इसीलिए वहां के लोग बेटी को पैदा होते ही जमीन में जिंदा गाड़ देते हैं ताकि वह धीरे-धीरे मर जाए। कई बार तो गड्ढा खोदकर उस पर घास डालकर बेटी को मरने के लिए छोड़ देते हैं।’

मां यह सब चीजें नहीं मानती थी और इसलिए गुलाबो को घर ले आई व अपनी तीन अन्य बेटियों के साथ पाला। गुलाबो के पिता बेटियों से बहुत प्यार करते थे। उनकी तीन बेटियां थीं। चूंकि वह देवी मां के उपासक थे, इसलिए बेटियों को उनका ही रूप मानते थे। वह सांपों को नचाने का काम करते थे। गुलाबो के पिता को डर था कि कहीं कोई उनकी बेटी को मार न दे, इसलिए वह जब सांप नचाने जाते तो गुलाबो को भी साथ ले जाते थे। गुलाबो ने सांपों के साथ नाचना सीख लिया। गांव-गांव जाकर पापा सांप नचाते तो गुलाबो भी साथ जातीं और शरीर पर सांप लपेटकर सांप की तरह ही कालबेलिया डांस करतीं।

‘डायन’ कहकर बुलाते थे लोग
कई लोग गुलाबो सपेरा को ‘डायन’ तक बुलाते थे क्योंकि वह जमीन से जिंदा निकली थीं और फिर थोड़ी बड़ी होने पर नाचना शुरू कर दिया था। इसका जिक्र गुलाबो ने एक इंटरव्यू में किया था। गुलाबो के पिता गांव-गांव घूमकर सांप नचाते थे। तब गुलाबो ने भी उनके साथ नाचना शुरू कर दिया और पिता के साथ गांव-गांव जानकर कालबेलिया डांस करने लगीं। वह सांपों का अपने शरीर से लपेटकर खूब नाचतीं।

दुनियाभर में गुलाबो ने पहुंचाया कालेबेलिया डांस
जब गुलाबो ने यह डांस शुरू किया था तब लोग इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते थे, लेकिन धीरे-धीरे गुलाबो को कालबेलिया डांस से ही पहचान मिलने लगी। गुलाबो सपेरा ने कालबेलिया डांस को ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। वह दुनिया भर में परफॉर्म कर चुकी हैं और दूर-दूर से लोग कालबेलिया डांस सीखने आते हैं।

गुलाबो सपेरा की जिंदगी तब पलट गई, जब 80 के दशक में वह पुष्कर में एक मेले के दौरान नाच रही थीं और तब वहां उनके डांस को देख सब हैरान रह गए। वहीं गुलाबो को एक कार्यक्रम में परफॉर्म करने का मौका मिला। इसके बाद तो गुलाबो सपेरा ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने लंदन से लेकर अमेरिका तक में परफॉर्म किया।

2016 में मिला पद्मश्री सम्मान
साल 2016 में गुलाबो सपेरा को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। गुलाबो सपेरा की प्रसिद्धि के बाद उनके समुदाय में लड़कियों को मारना बंद कर दिया गया और इसे वह अपनी सबसे बड़ी जीत और कामयाबी मानती हैं।