निजी स्कूल उतनी ही फीस लेंगे, जितना कोर्स कराया, शिक्षा मंत्री एवं संचालकों का फैसला

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जयपुर। प्रदेश में निजी स्कूल संचालकों की ओर से किया जा रहा आंदोलन गुरुवार को खत्म हो गया है। शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा और संचालकों के बीच गुरुवार को बातचीत हुई। जिसमें फैसला लिया गया है कि निजी स्कूल अब अभिभावकों से जितना कोर्स कराया गया है, उतनी फीस ले सकेंगे। यानी अब तक स्कूलों 60 फीसदी कोर्स पूरा हो चुका है, इस हिसाब से स्कूल 60 फीसदी ही फीस ले सकते हैं। साथ ही निजी स्कूलों को यूडी टैक्स और बिजली बिल को कम करने प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

शिक्षा मंत्री ने गुरुवार को निजी स्कूल संचालकों को बातचीत के लिए अपने निवास पर बुलाया था। पहले दो चरण की वार्ता में कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया, लेकिन शाम को हुई तीसरे चरण की बातचीत में स्कूलों को फीस वसूलने की सहमति दे दी गई। हालांकि, इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी अलग से आदेश जारी करेंगे।

यूडी टैक्स भी माफ होगा
निजी शिक्षण संस्थाओं को नगर निगम की ओर से वसूले जा रहे यूडी टैक्स (अर्बन कर) से छूट देने की मांग पर भी सरकार सकारात्मक विचार कर रही है। इस आशय के प्रस्ताव शिक्षा विभाग स्थानीय निकाय को भेजेगा, जहां से इसकी स्वीकृति जारी होगी।

बिजली बिल भी घरेलू श्रेणी का
इसके साथ ही निजी स्कूलों ने अवकाश काल में निजी स्कूलों को घरेलू श्रेणी मानते हुए छूट देने की मांग रखी है। शिक्षा मंत्री डोटासरा ने इस पर सहमति जताई है लेकिन यह मामला भी ऊर्जा विभाग के पास भेजा जायेगा। जहां से स्वीकृति जारी होगी। फिलहाल सरकार ने इस पर सहमति जताई है।

शीघ्र आदेश जारी होने चाहिए
निजी शिक्षण संस्थाओं के साथ फोरम ऑफ प्राइवेट स्कूल ने आंदोलन की शुरूआत की थी। विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व निजी स्कूल संगठनों ने एक साथ मिलकर इस आंदोलन में हिस्सा लिया। पैपा के संयोजक गिरीराज खैरीवाल ने बताया कि प्रदेशभर के निजी स्कूल पहली बार एक मंच पर आये। उन्होंने कहा कि सरकार को आज हुई सहमति पर शीघ्र आदेश जारी करना चाहिए।

जितना कोर्स उतनी फीस ले सकते हैं
‘मेरे दरवाजे सभी के लिए हमेशा खुलेंगे। सरकार ने कहा था कि जितना पाठ्यक्रम होगा, उतनी ही फीस ली जायेगी। कल भी वो ही निर्णय हुआ था, आज भी वो ही निर्णय है। अगर कोई विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा ले रहा है तो उसे फीस देनी होगी। किसी विद्यार्थी की पिछले साल की फीस बकाया है तो वो अभिभावक को देनी होगी।’
-गोविन्द डोटासरा, शिक्षा मंत्री