होम लोन से भी बचा सकते हैं 7 लाख रुपये तक इनकम टैक्स, जानें

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कोटा। इस साल के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आम आयकर दाता के लिए इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में दो तरह के स्लैब का प्रावधान किया है। पुराने स्लैब के तहत करदाता कई तरह के टैक्स छूट का दावा करते हैं। इनमें होम लोन (Home Loan) सबसे आकर्षक विकल्प है। आपको पता है कि होम लोन यदि एकल के बदले साझा (Combined) लेते हैं तो आप अपनी अपनी आमदनी में से सात लाख रुपये तक पर इनकम टैक्स बचा सकते हैं। हम बताते हैं कैसे?

एक व्यक्ति को 3.5 लाख रुपये तक की छूट
सीए मिलिंद विजयवर्गीय का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति एकल होम लोन (Home Loan) लेता है तो उसे अधिकतम साढे तीन लाख रुपये पर ही इनकम टैक्स में छूट का फायदा मिलता है। लेकिन यदि पति और पत्नी मिल कर होम लोन ले और उस पर छूट का दावा करे तो यह काफी फायदेमंद होता है। इससे एक तरफ तो लोन के लिए उनकी योग्यता बढ़ जाती है और बैंक भी ज्यादा राशि कम ब्याज दर पर देने को तैयार हो जाते हैं। दूसरी तरफ इनकम टैक्स में भी दूनी छूट का लाभ मिलता है।

इनकम टैक्स एक्ट में क्या है प्रावधान
इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax act) की धारा 24 (B) के तहत होम लोन के ब्याज पर व्यक्तिगत करदाता 2 लाख रुपये तक और धारा 80(C) के तहत मूल धन की अदाएगी पर 1.5 लाख रुपए टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। इस तरह एक करदाता को 3.5 लाख रुपए तक टैक्स छूट मिल जाती है। यदि कोई दंपत्ति साझा होम लोन (Joint Home Loan) लेते हैं और अपने आईटीआर (ITR) में इसका दावा अलग-अलग कर सकते हैं और कुल टैक्स छूट 7 लाख रुपये हो जाएगी।

संपत्ति में हिस्सेदारी जरूरी
साझा होम लोन (Joint Home Loan) पर इनकम टैक्स में अधिकतम सात लाख रुपये पर टैक्स छूट तो मिल सकती है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तों का पालन जरूरी है। आयकर की धारा (26) के तहत साझा होम लोन पर टैक्स छूट के लिए पति-पत्नी का मकान पर मालिकाना हक जरूरी है। मतलब कि संपत्ति की रजिस्ट्री में पति और पत्नी, दोनों का नाम होना चाहिए। इसी के साथ होम लोन में भी दोनों की हिस्सेदारी चाहिए। अगर सिर्फ होम लोन की योग्यता बढ़ाने के लिए साझा कर्जदार बनाया है, तो छूट का दावा सिर्फ वही व्यक्ति कर सकेगा जो संपत्ति का मालिक होगा।

लोन में दोनों का नाम पर ईएमआई एक ही व्यक्ति दे तो?
कभी कभी ऐसा होता है कि संपत्ति का मालिकाना हक में पति पत्नी दोनों का नाम है। होम लोन में भी दोनों का नाम है। लेकिन, ईएमआई (EMI) सिर्फ एक ही व्यक्ति दे रहा है। ऐसी स्थिति में टैक्स छूट का दावा भी ईएमआई देने वाला ही करेगा। साझा आवेदन से लोन की योग्यता बढ़ जाती है, बैंक कम ब्याज दर पर होम लोन दे सकते हैं। लेकिन इनकम टैक्स विभाग तो उन्हीं को टैक्स छूट देगा, जो ईएमआई भरेंगे।

ईएमआई में जितना हिस्सा उतना ज्यादा छूट
मान लीजिए किसी दंपति ने शादी के बाद मकान खरीदा और बैंक से लोन भी दोनों के नाम पर ही मिला है। अब टैक्स छूट का बंटवारा मकान खरीदते समय किए डाउन पेमेंट (Down Payment) और लोन की ईएमआई (Loan EMI) में हिस्सेदारी के आधार पर तय हुआ और दोनों डाउन पेमेंट और ईएमआई में बराबर भागीदारी करते हैं। ऐसी स्थिति में टैक्स छूट का लाभ भी बराबर मिलेगा। ऐसा नहीं होने पर जो ज्यादा ईएमआई देगा उसे छूट भी ज्यादा मिलेगी। हालांकि, छूट की रकम 3.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है। आमतौर पर बैंक लोन देते समय ही साझा आवेदक से हिस्सेदारी को लेकर एमओयू कराते हैं। एक बार कर्ज हिस्सेदारी तय हो जाए तो उसे बदला नहीं जा सकता है।