बच्चे की आंख में चूना जाने से जा सकती है सदा के लिए रोशनी

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डॉ, सुरेश पांडेय बालिका की चूने से जख्मी आंख चैक करते हुए।

कोटा। चूना या एडिबल कैल्शियम हाइड्रोक्साइड आँख में जाने से आँखों को गंभीर क्षति पहुँचती है। यहाँ तक कि आँख की रोशनी सदा के लिए जा सकती है। चूना (एडिबल कैल्शियम हाइड्रोक्साइड), प्रायः तंबाकू के साथ मिलाकर सेवन करने वाला पदार्थ है। जिसका देश के कुछ राज्यों, राजस्थान एवं हाड़ौती संभाग में काफी प्रयोग किया जाता है। हमारे देश में कई व्यक्ति तंबाकू का नशा करते है, वे तंबाकू के साथ चूना मिलाकर सेवन करते है।

यह चूना पाउच/थैली में मिलता है। छोटे बच्चे प्लास्टिक की चूना ट्यूब को खिलौना समझकर जिज्ञासावश चूने के पाउच को दबाते है जिसके कारण चूने के पाउच/ट्यूब का ढक्कन अचानक खुल जाने से पाउच के अन्दर भरा चूना पेस्ट आंख में चला जाता है। चूने का यह पेस्ट आंखों की पलक के अंदरूनी हिस्से (सुपीरियर फॉर्निक्स) में जम जाता है।

चूना यानी कि गंभीर अल्काली आई इंजुरी
चूने की पानी में घुलनशीलता कम होने के कारण पानी से बार बार आंख धोने कर भी चूना आंखों से नहीं निकलता। चूना जाने के बाद बच्चे अपनी आंखों में दर्द होने के कारण पलकों को ज़ोर से बन्द कर लेतें है। ऐसी स्थिति में दर्द को कम करने एवम् चूने का पेस्ट निकालने के लिए ऑपरेशन थियेटर में बेहोश करके आंखों को अच्छी तरह से खोलकर करके चूने का पेस्ट निकला जाता है। पलकों को डबल इवर्ट करके जमे हुए चूने के पेस्ट को पलकों के अंदर वाले हिस्से से निकला जाता है।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही आंखों में गंभीर क्षति
आंख के कंजक्टिाइवा , काॅर्निया (पारदर्शी पुतली), लिंबल स्टीम कोशिकाओं को गंभीर रूप से क्षति पहुंचा सकता है, जिससे आँख का कोर्निया धुंधला हो जाता हैै या गल जाता है अथवा व्यक्ति अंधा भी हो सकता है। अधिकांश रोगियों में अस्पताल पहुंचने से पहले ही नुकसान हो चुका होता है। अनेकों नेत्र ऑपरेशन के बाद भी चूने से चोटिल रोगियों में कई बार आंख की रोशनी लौटा पाना संभव नहीं हो पाता। पारदर्शी पुतली में धुंधलापन होने पर दान किया हुआ कोर्निया प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे भी पूर्णतः रोशनी आने की संभावना कम होती है।

चूने की ट्यूब को बच्चों की पहुंच से दूर रखें
चूने की ट्यूब मात्र कुछ रुपयों में देश के कोने कोने में छोटे गावों , कस्बों में आसानी से उपलब्ध है। हर वर्ष चूने के पेस्ट जाने से कई बच्चों की आंख की रोशनी जा चुकी है। अतः इस बात की गंभीरता को समझते हुए जिन बच्चों के माता-पिता तंबाकू का सेवन करते है, वे या तो तंबाकू का सेवन बंद कर देवें या चूने के पाउच को बच्चों की पहुंच से दूर रखें ताकि इस प्रकार की घटनाये भविष्य में नहीं हो। कई मजदूरी करने वाले माता पिता अपने नाबालिग बच्चों से चूना/तम्बाकू मंगवातें हैं। छोटे नासमझ बच्चे रास्ते में चूने की प्लास्टिक ट्यूब को जिज्ञासा वश दबातें हैं जिससे चूना पेस्ट अचानक आंखों में चला जाता है।

चूना आँख के लिए इतना घातक क्यों
सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डाॅ. सुरेश पाण्डेय ने बताया कि चूने के आंख के सम्पर्क में आने के कारण अलकली केमिकल इंजुरी होने के कारण आंख की कंजक्टिवा, कॉर्निया, लिम्बल स्टमेसेल कोशिकाओं को गंभीर क्षति पहुंचती है, जिसके कारण आंख के काॅर्निया (पारदर्शी पुतली) की पारदर्शिता हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।

चूना आँख में चले जाने पर क्या करेंः
वरिष्ठ नेत्र सर्जन डाॅ. विदुषी पाण्डेय ने बताया कि आंख में चूना जाने पर आंख को साफ पानी से बार बारे धोये। आंखों में चूना जाने पर बिना देरी किए तुरंत नजदीकी नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेकर आंख में जमे चूने को ऑपरेशन थियेटर में बेहोश कर निकालना अति आवश्यक हो जाता है। ऐसी स्थिति में नेत्र चिकित्सक से बिना देरी किए तुरन्त परामर्श लेवें। चूने से होने वाली केमिकल आई इन्ज्यूरी के कारण अधिकांश रोगियों में तीन चार बार ऑपरेशन करने के बाद भी नज़र में सुधार नहीं हो पाता एवम् आंख छोटी होने के कारण चेहरे की कुरूपता भी ही सकती है। गंभीर रोगियों में काॅर्निया में आये धुंधलापन दूर करने के लिए एम्नियोटिक मेम्बे्रन ग्राफ्ट एवं लिम्बल स्टमेसेल प्रत्यारोपण नामक आपरेशन कराने की आवश्यकता हो सकती है।

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