एग्री इंफ्रा फंड लॉन्च, PM Modi ने जारी किए किसान सम्मान निधि के 17000 करोड़

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘किसान रेल’ योजना से पूरे देश के किसानों को लाभ होगा क्योंकि वे शहरी क्षेत्रों में अपनी उपज बेच सकेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पहली किसान रेल महाराष्ट्र और बिहार के बीच शुरू हुई है। पीएम मोदी ने यह बातें रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 8.5 करोड़ किसानों के लिए 17 हजार करोड़ की छठी किस्त जारी करने और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लॉन्च करने के दौरान कहीं।

पीएम मोदी ने एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 100,000 करोड़ रुपये के वित्तपोषण की सुविधा पेश की है। पिछले माह जुलाई में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से रियायती दरों पर ऋण का विस्तार करने के लिए इस फंड की स्थापना को स्वीकृति दी थी। जबकि साढ़े आठ लाख किसानों के खाते में 17 हजार करोड़ रुपये की धनराशि तत्काल ट्रांसफर कर दी गई।

इस दौरान पीएम ने किसानों के हितों को लेकर केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं और लक्ष्यों को बताया। पीएम ने कहा, “पहले e-NAM के ज़रिए, एक टेक्नॉलॉजी आधारित बड़ी व्यवस्था बनाई गई। अब कानून बनाकर किसान को मंडी के दायरे से और मंडी टैक्स के दायरे से मुक्त कर दिया गया। अब किसान के पास अनेक विकल्प हैं।”

पीएम ने कहा कि दशकों से ये मांग और मंथन चल रहा था कि गांव में उद्योग क्यों नहीं लगते। अब आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किसान और खेती से जुड़े इन सारे सवालों के समाधान ढूंढे जा रहे हैं। एक देश, एक मंडी के जिस मिशन को लेकर बीते 7 साल से काम चल रहा था, वो अब पूरा हो रहा है।

पीएम के भाषण की मुख्य बातें:

  • इससे गांवों-गांवों में बेहतर भंडारण, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज की चेन तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके साथ-साथ साढ़े 8 करोड़ किसान परिवारों के खाते में, पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 17 हजार करोड़ रुपए ट्रांस्फर हुए हैं।
  • हलषष्टी और भगवान बलराम की जयंति के बेहद पावन अवसर पर देश में कृषि से जुड़ी सुविधाएं तैयार करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का विशेष फंड लॉन्च किया गया है। आज हलषष्टी है, भगवान बलराम की जयंती है। सभी देशवासियों को, विशेषतौर पर किसान साथियों को हलछठ की, दाऊ जन्मोत्सव की, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
  • अब हम उस स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां गांव के कृषि उद्योगों से फूड आधारित उत्पाद शहर जाएंगे और शहरों से दूसरा औद्योगिक सामान बनकर गांव पहुंचेगा। यही तो आत्मनिर्भर भारत अभियान का संकल्प है, जिसके लिए हमें काम करना है।
  • 2 दिन पहले ही, देश के छोटे किसानों से जुड़ी एक बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की गई है, जिसका आने वाले समय में पूरे देश को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। देश की पहली ‘किसान रेल’ महाराष्ट्र और बिहार के बीच में शुरु हो चुकी है।
  • किसानों से जुड़ी जितनी भी योजनाएं हैं, जितने भी रिफॉर्म हो रहे हैं, इनके केंद्र में हमारा छोटा किसान है। यही छोटा किसान है, जिस पर सबसे ज्यादा परेशानी आती रही है। इस छोटे किसान तक सरकारी लाभ पूरी तरह पहुंचे, ये हमारा संकल्प है।
  • ‘किसान रेल’ पूरी तरह से वातानूकुलित है। ये एक तरह से पटरी पर दौड़ता कोल्ड स्टोरेज है। इससे शहर के लोगों को ताजी वस्तुएं मिल सकेंगी और किसानों को अपनी फसल स्थानीय मंडियों पर मजबूरन बेचना नहीं पड़ेगा।
  • देश के बड़े शहरों तक छोटे किसानों की पहुंच हो रही है तो वो ताजा सब्जियां उगाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, पशुपालन और मत्स्यपालन की तरफ प्रोत्साहित होंगे। इससे कम जमीन से भी अधिक आय का रास्ता खुल जाएगा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
  • ये जितने भी कदम उठाए जा रहे हैं, इनसे 21वीं सदी में देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर भी बदलेगी, कृषि से आय में भी वृद्धि होगी। हाल में लिए गए हर निर्णय आने वाले समय में गांव के नज़दीक ही व्यापक रोज़गार तैयार करने वाले हैं।
  • ये हमारे किसान ही हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान देश को खाने-पीने के जरूरी सामान की समस्या नहीं होने दी। देश जब लॉकडाउन में था, तब हमारा किसान खेतों में फसल की कटाई कर रहा था और बुआई के नए रिकॉर्ड बना रहा था।
  • लॉकडाउन के पहले दिन से दिवाली व छठ तक, 8 महीने तक, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन आज हम दे पा रहे हैं, तो उसके पीछे हमारे किसानों की तपस्या जुड़ी है। हमारे किसानों ने अगर इतनी बड़ी तपस्या न की होती, तो हम ये काम न कर पाते।