डिजिटल विजन सिंड्रोम : कारण एवं निवारण

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कोटा। काेराेना (corona) काल में कर्मचारियों के घर से काम करने यानी वर्क फ्राॅम हाेम का चलन बढ़ गया है। वहीं, स्टूडेंट्स भी ऑनलाइन क्लास (online class) में बिजी हैं। इस सबके बीच लोगाें काे आंखों से संबंधित परेशानी हाेने लगी है। सुवि नेत्र चिकित्सालय एवम् लेजिक लेज़र सेंटर के निदेशक एवम् वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश कुमार पांडेय बताते हैं कि मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन लगातार देखने के कारण आंख से जुड़ी अधिकांश समस्याएं आ रही हैं, जिसे मेडिकल भाषा में डिजिटल विजन सिंड्रोम ( Digital Vision Syndrome) कहा जाता है।

इस कारण लाेगाें काे आंखों के लाल रहने, ड्राईनेस और खुजली की परेशानी हाेने लगी है। ऐसे लोगों को स्क्रीनटाइम में कटौती करने की सलाह दी जा रही है। डॉ. पांडेय स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिता रहे लाेगाें काे 20-20-20 नियम फॉलो करने की सलाह देते हैं।

उन्हाेंने कहा कि इसमें आपको काम के दौरान हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर की किसी चीज को देखना है। आप ब्रेक के दौरान 20 फीट टहल सकते है। इससे आंखों की मसल्स रिलेक्स होती हैं। एयर कंडीशनर में काम करने से भी आंखों में ड्राईनेस की परेशानी बढ़ सकती है। एसी में लगातार काम करने से बचें। अगर एसी के बीच काम कर रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लें।

ये हैं मुख्य परेशानियां

आई इरिटेशन : लगातार कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर काम करने, मूवी-गेम्स के कारण इरिटेशन की समस्या होती है। इस दौरान व्यक्ति को देखने में असुविधा होती है।
आई ड्रायनेस : आंखाें में लुब्रिकेंट की कमी हाेना इसका मुख्य कारण है। ड्राईनेस बढ़ने पर डाॅक्टर की सलाह लें एवम् आर्टिफिशियल टियर आई ड्रॉप का प्रयोग करें, जिसकी वजह से आंखें सूखेंगी नहीं।
आखों का लाल हाेना : इस दौरान आंखों में रेडनेस और खुजली भी हो सकती है। हालांकि एलर्जी और इंफेक्शन जैसे कई कारणों के कारण आंखों में रेडनेस की परेशानी हो सकती है।
आंखों से पानी आना : इसका कारण भी एलर्जी, इंफेक्शन, चोट हो सकते हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने के कारण आंखों से पानी आने की परेशानी हो सकती है।

काम के दौरान ऐसे रखें आंखों का ख्याल

बार-बार पलकें झपकाना : लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहना खतरनाक हो सकता है। आमतौर पर हमारी आंखें एक मिनट में 18-20 बार झपकती हैं, लेकिन स्क्रीन पर काम करते वक्त यह संख्या कम हो जाती है। इससे बचने के लिए कुछ देर में काम रोककर आंखों को बार-बार तेज झपकाएं।
अंधेरे में काम न करें : लाइटों को बंद कर काम न करें। काम करते समय इस बात का ध्यान रखें कि कमरे में पर्याप्त राेशनी हाेनी चाहिए।
ब्रेक लें : लगातार काम करने से आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए कुछ-कुछ देर में ब्रेक लेते रहें और नॉर्मल माहौल में घूमें। *दिन भर में दस से बारह ग्लास पानी पीए। इसके अलावा अपने नॉर्मल भोजन के साथ मल्टीविटामिन और एंटीऑक्सीडेंट फूड का भी उपयोग करें।
चेयर हाइट को एडजस्ट करें : डॉक्टर्स के मुताबिक आंखों की सेहत के लिए काम करते वक्त पॉश्चर और मॉनीटर के बीच बैलेंस करना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि मॉनिटर की हाइट नीचे हो, क्योंकि नीचे देखने से आंखें थोड़ी ही खुलती हैं और ज्यादा लुब्रिकेंट इवेपोरेट नहीं होता।
एंटीग्लेयर का इस्तेमाल : कंप्यूटर स्क्रीन में एंटीग्लेयर या ब्लू फिल्टर इस्तेमाल करें। एंटी ग्लेयर स्क्रीन की मदद से मॉनिटर स्क्रीन से निकलने वाली खतरनाक किरणों का असर आंखों पर कम होगा। जिन लोगों को चश्मा लगा है, वे इसका जरूर उपयोग करें। भले ही आपको बगैर चश्मे के भी साफ नजर आए, इसके बाद भी चश्मा जरूर लगाएं।