Fraud/ फिनालिसिस क्रेडिट समेत 21 पर 1.39 करोड़ की पेनाल्टी

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मुंबई। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने आम पब्लिक के शेयरों को ट्रांसफर के मामले में फिनालिसिस क्रेडिट एंड गारंटी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर्स सहित अन्य 20 लोगों पर 1.39 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई है। सेबी ने इसमें कई कंपनियों को दोषी पाया है।

सेबी ने जिन लोगों पर पेनाल्टी लगाई है उसमें फिनालिसिस क्रेडिट पर 20 लाख रुपए, बिपिन देवाचा पर 10 लाख रुपए, शाम साधुराम पर 10 लाख, दिलीप शाह पर 10 लाख, जिगर शाह पर 10 लाख, शरद गाड़ी, मोहम्मद रफी, रोमा खान, मोहम्मद सलीम खान, अमीर खान, अब्दुल खान, तलत मोहम्मद, रेहाना खान पर पांच-पांच लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसके अलावा बालाजी इनवेस्टमेंट, जगदीश सारखोट, मार्केट पल्स, सागा फाइनेंशियल आदि पर भी जुर्माना लगाया गया है।

निवेशकों की अपील से पहले ही शेयर ट्रांसफर हुए
सेबी ने पाया कि जब उसने इश्यू के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट लिंकटाइम इंडिया के रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि निवेशकों की शिकायतें पेंडिंग है। सेबी ने पाया कि जब शेयर धारकों ने अपने डीमैट शेयरों को ट्रांसफर करने की अपील की तो इसे रिजेक्ट कर दिया गया। कहा गया कि ये शेयर पहले ही ट्रांसफर किए जा चुके हैं। इसी के बाद सेबी ने जांच की। इसमें पाया गया कि कई कंपनियों के पास फिनालिसिस क्रेडिट के 6.84 लाख शेयर्स हैं।

सेबी ने जांच को मुंबई पुलिस को भी सौंपा
सेबी ने जांच में बताया कि उसे पब्लिक से कंपनी के बारे में शिकायत मिली थी। इस शिकायत को उसने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को भी सौंप दिया था। सेबी ने कहा कि कंपनी के एमडी के रूप में सज्जाद पावने ने दिसंबर 2012 में इस्तीफा दे दिया था। हालांकि इस इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया था। क्योंकि ढेर सारी शिकायतें पेंडिंग थीं। सेबी को पहली शिकायत 29 अगस्त 12 को मिली थी। जबकि अंतिम शिकायत 8 मई 13 को मिली।

बनावटी शेयर सर्टिफिकेट का उपयोग किया गया
सेबी ने जांच में पाया कि ओरिजिनल पब्लिक शेयर होल्डर्स जो जारी किया गया था वह नकली था। शेयर सर्टिफिकेट के रूप में बनावटी डाक्यूमेंट सबमिट किए गए। इन शेयरों की बाद में खरीदी बिक्री की गई। फिनालिसिस क्रेडिट एंड गारंटी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 7 अप्रैल 1988 को हुई थी। कंपनी ने 23 अगस्त 1995 को नाम बदलकर फिनालिसिस क्रेडिट एंड गारंटी कंपनी लिमिटेड कर दी।

कंपनी 19 जून 1996 को बीएसई पर लिस्ट हुई और 13 मई 2002 को नियमों का उल्लंघन करने पर सस्पेंड हो गई। हालांकि 28 मार्च 2012 को सस्पेंशन हट गया। इसके बाद फिर कंपनी को 9 सितंबर 2014 को सस्पेंड कर दिया गया।