मार्च 2021 तक कर्ज मुक्त होने के लिए राइट्स इश्यू लाएगी रिलायंस

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मुंबई। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) कर्जमुक्ति के लिए राइट्स इश्यू (Reliance rights issue) लाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला बोर्ड बैठक में होगा। आरआईएल ने सोमवार को स्टॉक एक्सचेंज की दी जानकारी में कहा कि 30 अप्रैल को कंपनी की बोर्ड बैठक होगी जिसमें मौजूदा शेयरधारकों को राइट्स के आधार पर इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

चौथी तिमाही के वित्तीय परिणाओं पर भी होगा फैसला
आरआईएल की ओर से शेयर बाजारों को दी गई सूचना में कहा गया है कि गुरुवार को होने वाली बोर्ड बैठक में 31 मार्च 2020 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटिड वित्तीय परिणामों को भी मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा कंपनी के शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा।

मौजूदा समय में बीएसई में रिलायंस के 23 लाख शेयर हैं, जिसमें से आधे शेयर मुकेश अंबानी और उनके परिवार के पास हैं। मंगलवार सुबह कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.85 लाख करोड़ रुपए था। हालांकि, रिलायंस ने राइट्स इश्यू के साइज और अन्य जानकारी शेयर बाजारों को नहीं दी है।

29 साल बाद सार्वजनिक रूप से धन जुटाएगी रिलायंस
आरआईएल इस समय करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए के कर्ज से जूझ रही है। अगस्त 2019 में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि उनकी कंपनी 18 महीने यानी मार्च 2021 तक पूरी तरह से कर्जमुक्त हो जाएगी। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए कंपनी राशि जुटाने की दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है।

इस महीने की शुरुआत में आरआईएल के बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टेबल डिबेंचर (एनसीडी) के जरिए 25 हजार करोड़ रुपए जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब राइट इश्यू के जरिए कंपनी 29 साल बाद सार्वजनिक रूप से धन जुटाने की योजना बना रही है। इससे पहले रिलायंस ने 1991 में कन्वर्टेबल डिबेंचर्स के जरिए धन जुटाया था। बाद में इन डिबेंचर्स को 55 रुपए की दर से इक्विटी शेयर में बदल दिया था।

क्या होता है राइट्स इश्यू
शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए राइट्स इश्यू लाती हैं। इसके तहत कंपनियां अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने को मंजूरी देती हैं। इसके तहत शेयरधारक एक निश्चित अनुपात में ही शेयर खरीद सकते हैं। यह अनुपात कंपनी तय करती है। शेयरधारक कंपनी की ओर से तय अवधि में ही राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं। राइट्स इश्यू के जरिए जारी किए जाने वाले शेयर से कंपनी के मालिकाना हक पर कोई असर नहीं पड़ता है।