कर्मठता एवं विनयशीलता ही कुंती मूंदड़ा की पहचान

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कोटा। गीता सत्संग आश्रम समिति के मंत्री पद पर आसीन कुंती मूंदड़ा ने सामाजिक क्षेत्र एंव जनहित के सेवा काय॔ में अपनी कर्मठता एवं विनयशीलता से समाज में अलग ही स्थान बनाया है। कुंती मूंदड़ा ने गीता भवन ही नहीं अपितु वैश्य समाज के साथ माहेश्वरी समाज में भी सेवा कार्यो में अपना योगदान दिया है।

कुंती मूंदड़ा ने वैश्य समाज के अन्नकूट महोत्सव में अध्यक्ष पद पर रहते हुए अलग-अलग समाजों के वैष्णव परिवारों को जोड़ने का अनेक बार सफल एंव अद्वितीय आयोजन किया है। आप अभी भी वैश्य समाज में प्रदेश मंत्री पद पर आसीन हैं।

गीता सत्संग आश्रम समिति जो कि प्रदेश की प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था है, जिसका नेतृत्व हमेशा समिति के पुरुष सदस्यों के हाथों में रहा है। ऐसी संस्था में कुंती ने सन् 2009 में सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद सन् 2012 एवं सन् 2015 के गीता सत्संग आश्रम समिति के चुनाव में सर्वाधिक मत प्राप्त करके वह विजयी हुईं एवं 2015 में समिति की उपाध्यक्ष बनी।

2015 की गीता जयंती महोत्सव में अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके निर्देशन में जो कार्यक्रम हुए, वो गत 10/12 सालों के आयोजनों में सबसे सफल आयोजन था। इसी वष॔ 15 जुलाई 2018 को हुए समिति के चुनाव में विजयी हो कर कुंती गीता सत्संग आश्रम समिति के मंत्री पद पर चुनी गई। कुन्ती मूंदड़ा ने सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्वों को बखूबी निभाते हुए आज की नयी पीढ़ी के लिए एक अनुकरणीय एवं जीवन्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। (आलेख किशन मूंदड़ा)