निर्यात मांग नहीं निकली तो मिर्ची के दाम घटेंगे

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मुकेश भाटिया, कोटा।
कोरोना वाइरस के कारण देश भर के किसानो के सामने मजदूर नहीं मिलने से रबी फसल की कटाई के साथ ही बिक्री की समस्या भी खड़ी हो गयी है ! देश में लाल मिर्ची का जितना उत्पादन होता है, उसमें से 50% से 60% उत्पादन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में होता है। इन दोनों राज्यों इसबार 6 लाख एकड़ में मिर्ची की रोपाई हुयी थी और उत्पादन 7-8 लाख टन होने की उम्मीद है।

दोनों राज्यों में अभी भी 30% से 40% मिर्ची की फसल की कटाई होना बाकी है। मिर्ची किसान बोल रहे हैं कि तापमान बढ़ने से अब मिर्ची पौधों से टूटकर खेतो में गिर रही है। जिन किसानो ने यहाँ मिर्ची की कटाई कर ली है, उनने फसल को कोल्ड स्टोरेज में रख दिया है। रबी का सीजन अब 30 अप्रैल तक पूरा हो जायेगा। कोरोना वाइरस के कारण लॉक डाउन हुआ, इससे मिर्ची की घरेलू और निर्यात मांग पर काफी बुरा असर पड़ा है।

अनुभवी बोल रहे है कि सभी किसान कोल्डस्टोरेज का खर्चा नहीं उठा सकते। कारण 50-60 किलो की मिर्ची की एक बोरी का 6 माह का भाड़ा 160 से 200 रु बोरी लगता है। कोरोना वाइरस से इसबार इंडिया से मिर्ची का निर्यात 1 जनवरी 20 से 31 मार्च 20 तक 3 माह में सिर्फ 50 हजार टन ही हुआ है।

ये औसत की तुलना में 50% से भी कम है। आँध्रप्रदेश और तेलंगाना के किसान बोल रहे है कि अगले सीजन के लिए अब किसानो को कीटनाशक और फ़र्टिलाइज़र लेना है, लेकिन इनकी दुकाने भी बंद हैं। अनेक किसानो के पास पैसे भी नहीं है।

फ़िलहाल गुंटूर में मिर्ची तेजा 15500 रु क्विंटल और 334 नंबर के भाव 15000 रु क्विंटल चल रहे है। लॉक डाउन के कारण इस लाइन से बिके माल की लोडिंग में दिक्कत आ रही है। यदि बिक्री की छूट नहीं मिली, साथ ही निर्यात मांग भी नहीं निकली तो आवक को देखते हुए बाजार खुलते ही मिर्ची की बाढ़ आ जाएगी और भाव घट भी सकते है।