सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी को लेकर वित्त मंत्रालय को नोटिस

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महिलाओं के जीवन यापन के लिए सैनिटरी पैड एक अावश्यक वस्तु है और ये उनकी ‘राइट टु लाइफ’ और मर्यादा से जु़ड़ा हुआ है।

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को वित्त मंत्रालय और जीएसटी काउंसिल को उस याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है जिसमें याचिकाकर्ता ने सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने को चुनौती दी है।

हाई कोर्ट की ऐक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 15 नवंबर तक इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर जवाब दाखिल करें। साथ ही याचिकाकर्ता से कहा है कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में एक रिप्रजेंटेशन दें।

इस मामले में जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी स्कॉलर जरमीना इसार खान की ओर से PIL दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि भारत की महिला के साथ ये भेदभाव है और यह गैर संवैधानिक है। सैनिटरी नैपकीन पर इस तरह से 12 फीसदी जीएसटी लगाना अवैध है।

एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट अमित जॉर्ज ने कहा कि नैपकीन की चाहे जो भी वैल्यू हो उस पर एक दर से 12 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। जबकि अन्य सामग्री में अन्य तरह से टैक्स लगाया गया है।

महिलाओं के जीवन यापन के लिए सैनिटरी पैड एक अावश्यक वस्तु है और ये उनकी ‘राइट टु लाइफ’ और मर्यादा से जु़ड़ा हुआ है साथ ही ये स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मामला है। महिलाओं के हेल्थ प्रॉटेक्शन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाए जाने को खारिज करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि नैपकीन को जीएसटी से मुक्त किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि काजल, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, अलता, कांच की चूड़ी, पूजा सामग्री और अन्य तरह के गर्भ निरोधक और कॉन्डम आदि को जीएसटी से अलग रखा गया है लेकिन नैपकीन को जीएसटी के दायरे में रखा गया है।