एलन कॅरियर के देवेश व जैनिशा को राष्ट्रपति पुरस्कार

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कोटा। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के दो स्टूडेंट्स को बुधवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बाल शक्ति पुरस्कार-2019-20 से सम्मानित किया। इस सम्मान का चयन भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विद्यार्थियों के विभिन्न क्षेत्रों में प्राप्त की गई उपलब्धियां के आधार पर की गई।

संस्था के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने बताया कि एलन के विद्यार्थी कक्षा 11 की जैनिशा अग्रवाल तथा कक्षा 7 के देवेश भैया को यह पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में दिया गया। इन पुरस्कार के लिए देशभर के लाखों बच्चे आवेदन करते हैं, विभिन्न श्रेणियों में बच्चों की अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धियों के आधार पर पुरस्कार के लिए चयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

जिनिशा को स्टनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने दी स्कॉलरशिप
एलन की छात्रा जिनिशा की अद्भुत अकादमिक उपलब्धियों पर यह पुरस्कार दिया गया। जिनिशा को सत्र 2019 में स्टनफोर्ड यूनिवर्सिटी में वर्कशॉप के लिए 100 प्रतिशत स्कॉलरशिप का ऑफर मिला और 21 दिन की यह वर्कशॉप 24 जून से 14 जुलाई के बीच अटैंड की। इसके साथ ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा भी समर वर्कशॉप के लिए 90 स्कॉलरशिप का ऑफर दिया गया था।

इसी तरह साउथ ईस्ट एशियन मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में गोल्ड, थाइलैंड इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में गोल्ड, हांगकांग इंटरनेशनल मैथ्स ओलम्पियाड में सिल्वर, आईजेएसओ ओसीएससी कैम्प में सलेक्शन हो चुका है। इससे पूर्व भी कई गोल्ड व सिल्वर मैडल जीत चुकी हैं। मूलतः गुजरात निवासी जिनिशा तीन साल से एलन की क्लासरूम स्टूडेंट है। पापा सुनील अग्रवाल व्यवसायी हैं तथा मां बरखा अग्रवाल गृहिणी हैं।

200 से अधिक मैडल जीत चुका है सातवीं का देवेश
कक्षा सात का विद्यार्थी देवेश भाया 200 से अधिक मैडल अब तक विभिन्न नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगी परीक्षाओं में जीत चुका है। महाराष्ट्र के जलगांव निवासी देवेश इन दिनों कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहा है। हाल ही में देवेश ने साउथ ईस्टन मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में गोल्ड, थाइलैंड इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलम्पिया डमें गोल्ड, इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड में रैंक-1, होमी भाभा जूनियर साइंटिस्ट एग्जाम में गोल्ड मैडल प्राप्त कर चुका है। मां पल्लवी भैया इंटीरियर डिजाइनर हैं तथा पिता पंकज भैया आर्किटेक्ट हैं।

किन्हें मिलता है पुस्कार
विद्यार्थियों में नवाचार, शैक्षणिक, सामाजिक सरोकार, आर्ट एण्ड कल्चर, स्पोर्ट्स के क्षेत्र में आकर्षण बढ़ाने तथा विशेष उपलब्धियां प्राप्त करने वालों को प्रोत्साहन देने के लिए यह पुरस्कार 1996 में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया। वर्ष 2018 में इस पुरस्कार का नाम बदलकर बाल शक्ति पुरस्कार किया गया।