जीएसटी पोर्टल डाउन, रजिस्ट्रेशन में छूटे डीलर्स को पसीने

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नई दिल्ली। गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में रजिस्ट्रेशन लेने की कोशिश कर रहे हजारों कारोबारियों को इन दिनों खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। मौजूदा रजिस्टर्ड कारोबारियों के माइग्रेशन के साथ ही नए रजिस्ट्रेशन के लिए 25 जून से खुले जीएसटी के कॉमन पोर्टल gst.gov.in पर लोड इतना ज्यादा है कि बहुत मुश्किल से साइट ओपन हो रही है।

अगर लंबी कवायद के बाद साइट खुलती भी है तो किसी भी लिंक पर क्लिक करते ही नेटवर्क एरर आ जाता है। रजिस्ट्रेशन के दूसरे चरण में 15 जून तक दिल्ली में करीब 3 लाख वैट रजिस्टर्ड कारोबारियों ने एनरॉलमेंट नंबर हासिल कर लिया था, जबकि बाकी करीब एक लाख को प्रविजनल आईडी-पासवर्ड भर मिला था।

इस आईडी पासवर्ड के साथ ये कारोबारी 26 जून से पोर्टल पर लॉग-इन कर रहे हैं, जबकि एनरॉलमेंट पाने वाले मांगे गए डॉक्युमेंट अपलोड कराकर प्रविजिनल रजिस्ट्रेशन नंबर और सर्टिफिकेट डाउनलोड करने की कोशिश कर रहे हैं।कारोबारियों की ओर से मंगलवार सुबह से ही पोर्टल स्लोडाउन की शिकायतें आने लगीं।

ऑल दिल्ली कंप्यूटर ट्रेडर्स असोसिएशन के एक सदस्य ने बताया, ‘हमारे कई सदस्यों का एनरॉलमेंट हो गया है और उन्हें ऐप्लिकेशन रेफरेंस नंबर (एआरएन) भी मिल गया था। लेकिन कुछ डॉक्युमेंट अपलोड करने के लिए वे सोमवार सुबह से ही कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कामयाबी नहीं मिली है।’ यही हाल पहली बार जीएसटी के दायरे में आ रहे कपड़ा व्यापारियों और कुछ अनाज व्यापारियों का भी है।

नया रजिस्ट्रेशन लेने में उनके पसीने छूट रहे हैं। हालांकि, नए रजिस्ट्रेशन के लिए वैधानिक रूप से कारोबारियों के पास 30 दिन का समय होगा, लेकिन मौजूदा रजिस्टर्ड ट्रेडर्स के लिए जरूरी है कि वे माइग्रेशन के साथ ही नए टैक्स रिजीम में जाएं। इससे वे अपने क्लोजिंग स्टॉक पर इनपुट क्रेडिट ले सकेंगे और रिफंड को आसानी से कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे।

वैट विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक करीब 3.9 लाख ट्रेडर्स को प्रविजिनल आईडी पासवर्ड जारी हुए हैं, जिनमें से लगभग 3 लाख को एआरएन मिल गया है और उनमें से ज्यादातर का माइग्रेशन तय है।30 जून तक प्रविजनल जीएस-टिन पाने वाले ट्रेडर 1 जुलाई से जीएसटी रजिस्टर्ड माने जाएंगे और उनका टिन भी स्थायी हो जा जाएगा।

चूंकि जीएसटी ऐक्ट 1 जुलाई से लागू हो रहा है, इसलिए अभी सिर्फ प्रविजनल रजिस्ट्रेशन ही मिल सकता है। जीएसटीएन अधिकारियों ने पोर्टल स्लोडाउन से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन सीबीईसी के एक अधिकारी ने बताया कि माइग्रेशन के साथ ही नए रजिस्ट्रेशन के चलते पोर्टल पर दबाव ज्यादा है। जहां बड़ी संख्या में कैंसल्ड रजिस्ट्रेशन नया रजिस्ट्रेशन ले रहे हैं, वहीं पहली बार टैक्स रिजीम में आने वाले ट्रेडर भी नए रजिस्ट्रेशन की कोशिश कर रहे हैं।