जीएसटी की कैसे करें तैयारी, देखिये वीडियो

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कोटा। गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं । जीएसटी के बारे वो सब कुछ जिनके बारे में आपको आपके सवालों का जवाब नहीं मिला है। खासतौर पर व्यापारियों को बिजनेस करने के तरीके में होने वाले बदलाव में पूरी तरह से कोई जानकारी नहीं है। आपको आज बताने जा रहे हैं सीनियर टैक्स कसल्टेंट अनिल काला।  देखिये वीडियो……………

खरीद-बिक्री का रखना होगा रिकॉर्ड
ऐसे व्यापारी जो अपना पूरा बिजनेस कैश पर करते थे, उनको हरेक खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखना होगा। इसी से उनके इनपुट टैक्स क्रेडिट के बारे में पता चलेगा। 

इस तारीख को भरना होगा रिटर्न
व्यापारियों को रिटर्न फाइल करने के लिए 15 दिनों की मोहलत मिलेगी। उदाहरण के तौर पर जुलाई के महीने में ट्रांजेक्शन का रिटर्न 15 अगस्त तक भरने की मोहलत मिलेगी। हालांकि सरकार ने फिलहाल केवल जुलाई महीने के रिटर्न के लिए  25 अगस्त तक की मोहलत मिलेगी।  

रिटर्न भरने में हुई गलती, तो सुधारने के लिए मिलेगा 2 महीने का समय 
जीएसटी एक्ट के अनुसार सरकार ने केवल जुलाई के लिए भरे गए रिटर्न में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए दो महीने का वक्त मिलेगा। अगस्त में भरे गए रिटर्न के लिए सरकार बाद में जानकारी देगी, कि उसमें गलती होने पर सुधारने के लिए कितना वक्त मिलेगा। 

छोटी बिक्री होने पर नहीं देना होगा किसी तरह का बिल
जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों को 1 रुपये से लेकर के 200 रुपये की बिक्री होने पर बिल देने से मुक्ति दे दी है। व्यापारी इस तरह की बिक्री के लिए पूरे दिन का एक बिल काट सकते हैं। वहीं अगर किसी ऐसे सामान की बिक्री हुई है, जिस पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगता है वो इनवॉयस बिल की जगह बिल ऑफ सप्लाई बना सकता है। 

पुराने स्टॉक पर नहीं मिलेगा इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ
जीएसटी लागू होने के बाद अगर किसी व्यापारी के पास पुराना स्टॉक पड़ा है और उसका बिल नहीं है, तो उसको भी व्यापारी जीएसटी टैक्स स्लैब लगाकर के बेच सकता है। लेकिन इस पर उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। 

गुड्स के लिए तुरंत जारी करना होगा बिल
जीएसटी में गुड्स और सर्विस सेक्टर में व्यापारियों को अलग-अलग रखा गया है। अगर कोई व्यापारी गुड्स में डील करता है तो उसको सामान की डिलीवरी से पहले बिल जारी करना होगा। सेवाओं के मामले में डिलीवरी के 30 दिनों के भीतर बिल भेजे जा सकते हैं।

छोटे कारोबारियों को नहीं रखना होगा अकाउंटेंट
छोटे कारोबारी जिनका टर्नओवर 75 लाख रुपये से कम है उनको अलग से सीए या फिर अकाउंटेंट रखने की जरुरत नहीं है। छोटे कारोबारियों के लिए मासिक या सालाना शुल्क पर बाजार में कई सीए या आईटी समाधान मौजूद होंगे।