बुराई का विरोध न करना और चुप रह जाना भी देशद्रोह माना चाहिए

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कोटा। कोटा इन्टेलेक्चुअल फोरम की सेमिनार रविवार को झालावाड रोड स्थित होटल वंदना में आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि राजस्थान हाईकोर्ट में पूर्व महाधिवक्ता गुरूचरणसिंह गिल थे। अध्यक्षता कर्नल पीयूष अग्रवाल ने की। सेमिनार में श्रोताओं और अतिथियों के बीच परस्पर चर्चा का सत्र भी आयोजित किया गया।

इस दौरान गुरूचरण सिंह गिल ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। जिसे बड़ा बनाने में देशवासियों का सबसे बड़ा योगदान है। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सज्जन शक्ति का प्रभावी भूमिका में होना बहुत जरूरी है। यदि सज्जनशक्ति तटस्थ भूमिका में आ जाती है तो गलत लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र को नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि देश के सुनियोजित विकास के लिए सत्ता व्यवस्था में स्थायित्व जरूरी तत्व है। कई। बुराई का विरोध न करना और चुप रह जाना भी देशद्रोह की श्रेणी में माना जाना चाहिए। जब देश की बात होती है तो राष्ट्रहित में बोलना हर भारतीय का कर्तव्य है। भारतीय प्रवृत्ति कभी किसी को नुकसान पहुंचाने की नहीं रही है।

देश के प्रबुद्ध वर्ग का कर्तव्य है कि वे खुलकर सामने आएं और देश के मुद्दों पर अपनी राय रखें। लोकतंत्र के महापर्व पर इन्टेलेक्चुअल वर्ग की विशेष भूमिका होती है। जिसे फिलहाल यह वर्ग निभाने में कुछ नाकाम रहा है। कर्नल पीयूष अग्रवाल ने कहा कि देश से जितना प्यारा करेंगे, उतना ही बेहतर है। देश को आगे बढाने के लिए मजबूत नेतृत्व की जरूरत रहती है।