स्टार्टअप कंपनियों से खरीदेंगे सामान तो 18 की बजाय सिर्फ 6% ही लगेगा GST

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नई दिल्ली । यदि आप छोटी और स्टार्टअप कंपनियों से सामान खरीदते हैं या सेवा लेते हैं तो GST में भी राहत मिलेगी। लेकिन यह तभी होगा जबकि कंपनी उसे मिली राहत आपको ट्रांसफर करे। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं कस्टम बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत छोटी सर्विस कंपनियां 30 अप्रैल तक जीएसटी कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुन सकती हैं।

यह होगी जीएसटी की दर
कंपोजिशन स्कीम वही सर्विस कंपनियां चुन सकती हैं, जिनका टर्नओवर 2018-19 में 50 लाख रुपए तक था। उन्हें 1 अप्रैल से 6% की दर से टैक्स देना पड़ेगा। इसमें 3% सेंट्रल जीएसटी और 3% स्टेट जीएसटी होगा। अभी ज्यादातर सर्विसेज पर 12% और 18% जीएसटी लगता है।

नई कंपनियों को भी फायदा
नई कंपनियां भी इस स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं। जो कारोबारी गुड्स और सर्विसेज दोनों का बिजनेस करते हैं, वे भी इस विकल्प को चुन सकते हैं। अभी तक सर्विसेज कंपनियों को सामान्य श्रेणी में ही रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था।

सिर्फ रेस्तरां को कंपोजीशन की छूट थी। जीएसटी काउंसिल ने 10 जनवरी को 32वीं बैठक में 50 लाख रुपए तक टर्नओवर वाली सर्विसेज कंपनियों को कंपोजीशन का विकल्प देने का फैसला किया था। लेकिन काउंसिल ने उसी समय यह फैसला भी किया था कि यह बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा।

जानिए नए नियम के बारे में
सवाल : बिजनेस 50 लाख से ज्यादा है तो सामान्य श्रेणी ही रहेगी नियम किनके लिए है?
जवाब : जो कारोबारी गुड्स और सर्विसेज दोनों का बिजनेस करते हैं, वे भी कंपोजीशन स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं। जिन सर्विस कंपनियों का टर्नओवर पिछले साल 50 लाख रुपए से ज्यादा था, वे सामान्य श्रेणी में ही रहेंगी।
सवाल : इन्हें क्या करना पड़ेगा?
जवाब : कंपनियों को 30 अप्रैल तक जीएसटी सीएमपी-02 फॉर्म भरना पड़ेगा। जीएसटी पोर्टल पर इसे ऑनलाइन भरा जा सकता है। नई कंपनी यह विकल्प चुनती है तो उसे रजिस्ट्रेशन के वक्त जीएसटी आरईजी-01 फॉर्म में इसका जिक्र करना पड़ेगा।
सवाल : कंपोजीशन में तिमाही रिटर्न की सुविधा मिलती है
जवाब : ये कारोबारी टैक्स वाला बिल नहीं दे सकते। ग्राहक से टैक्स ले भी नहीं सकते हैं। बिल पर कंपोजीशन लिखना जरूरी है।

अभी क्या: अभी तक कंपोजीशन की सुविधा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और ट्रेडर्स के लिए थी। सर्विसेज में सिर्फ रेस्तरां को यह विकल्प चुनने की सहूलियत थी। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और ट्रेडर्स के लिए पहले इसकी सालाना टर्नओवर की सीमा एक करोड़ रुपए थी।

इसे 1 अप्रैल 2019 से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दिया गया है। कंपोजीशन स्कीम में ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर को टर्नओवर के 1% के बराबर जीएसटी देना पड़ता है। रेस्तरां के लिए 5% जीएसटी का नियम है।