हैकर्स के निशाने पर 4G नेटवर्क, कॉल के साथ ब्लॉक हो सकता है फोन

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टेक्नॉलोजी और हाई-स्पीड इंटरनेट ने दुनियाभर में कम्युनिकेशन को एक नई उड़ान दी है। यूजर्स अब कॉलिंग के साथ 4G इंटरनेट स्पीड की मदद से दुनिया के किसी भी कोने में अपने फ्रेंड्स और फैमिली के साथ फोटो और विडियो शेयर कर सकते हैं। हाई-स्पीड इंटरनेट के कई फायदे हैं, लेकिन इस बात को भी पूरी तरह नहीं नकारा जा सकता कि इसकी वजह से यूजर्स की पर्सनल डेटा और प्रिवेसी पर भी खतरा बढ़ा है। इस वक्त दुनिया के ज्यादातर यूजर्स LTE के जरिए हाई-स्पीड 4G इंटरनेट को ऐक्सेस कर पा रहे हैं।

हाल ही में की गई एक रिसर्च में रिसर्चर्स ने 4G नेटवर्क की दर्जनों कमियों का पता लगाया है। नेटवर्क में मौजूद इन खामियों की सहायता से हैकर्स यूजर्स के मोबाइल नेटवर्क के साथ ही उनके डेटा को आसानी से हैक कर सकते हैं।

LTE पर हैं 51 खामियां
कोरिया अडवांस्ड इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी कॉन्स्टिट्यूशन ने LTE के डिजाइन और इंप्लीमेंटेशन का विश्लेषण किया। इसमें उन्होंने पाया कि इस नेटवर्क पर यूजर्स की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली कुल 51 खामियां मौजूद हैं। इनमें से 36 बिलकुल नई हैं और इनके कारण दुनिया के करोड़ों यूजर्स के डेटा और मोबाइल नेटवर्क को बहुत बड़ा खतरा है।

ये है खतरा
एलटीई पर मिली इन कमियों से यूजर्स के डेटा को असल मायने में किस प्रकार से नुकसान पहुंचाया जा सकता है इस बारे में रिसर्चर्स ने ज्यादा विस्तार से नहीं बताया। हालांकि उन्होंने माना कि इससे एंड-यूजर्स को ही नुकसान होगा।

रिसर्चर्स ने आगे कहा कि इन कमियों की वजह से हैकर्स फोन के नेटवर्क को बंद करने के साथ ही मोबाइल बेस स्टेशन के भी काम में बाधा पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा इनकमिंग कॉल्स और मेसेज को भी हैकर्स आसानी से ब्लॉक कर सकते हैं।

रिसर्चर्स ने किया ‘फजिंग’ तकनीक का इस्तेमाल
LTE 4G नेटर्वक पर मौजूद इन कमियों का पता लगाने के लिए रिसर्चर्स ने ‘फजिंग’ तकनीक का सहारा लिया था। इस तकनीक में किसी प्रोग्राम में डेटा को फीड कर उसकी असामान्यता का पता लगाया जाता है।

इस मामले में रिसर्चर्स की टीम ने LTEFuzz नाम के टूल का सहारा लिया था। इसकी मदद से रिसर्चर्स ने मोबाइल नेटवर्क पर अलग-अलग मलीशियस कनेक्शन बनाकर उसके रिसपॉन्स और कमियों को पहचानने की कोशिश की।

रिसर्चर्स ने फाइल की रिपोर्ट
LTE नेटवर्क की इन कमियों की जांच रिपोर्ट GSMA को सौंप दी है। GSMA वह संस्था है जो 4G स्टैंडर्ड्स का नेतृत्व करती है। रिपोर्ट मिलने के बाद से अभी तक इस संस्था की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है।

इसीलिए अभी यह कहना मुमकिन नहीं कि इसे कब तक फिक्स किया जा सकता है। हालांकि इससे जिस प्रकार के खतरें हैं उसे देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जीएसएमए जल्द ही इस समस्या का हल निकालेगी।