Glaucoma: लक्षण, बचाव एवं इलाज, देखिए वीडियो

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Glaucoma : (काला मोतियाबिंद) सामान्य तौर पर आँखों की बीमारी है। जिसे हम काला मोतियाबिंद भी कहते है। आधिक उम्र होने पर आँखों की समस्या अधिक देखी जाती है। पर हम हर आँखों की समस्या को ग्लूकोमा का कारण नहीं कह सकते है। आइये जानते हैं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नैत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पांडेय से ग्लूकोमा के बारे में।

डॉ.पांडेय का कहना है कि ग्लूकोमा आँखों में होने वाली एक जटिल समस्या है। जो आँखों के आप्टिकल नर्ब पर अधिक प्रभाव पड़ने के कारण होता है। यह प्रभाव आप्टिकल नर्व को नुकसान पहुचता है, आप्टिकल नर्व वह होती है जो आँखों के संदेश को दिमाग तक ले जाने का कार्य करती है।

आँखों के सामने वाले हिस्से में एक द्रव्य पाया जाता है जो हमारी आँखों को पोषण प्रदान करता है। ये सफेद द्रव्य अधिक मात्र में बनने लगता है तथा लगातार आँखों से बाहर आता है। जब यह बाहर नहीं निकलता तो आँखों की रौशनी धीरे धीरे प्रभावित होने लगती है। जानने के लिए वीडियो देखिए-

ग्लूकोमा के प्रकार
क्रोनिक ग्लूकोमा: क्रोनिक ग्लूकोमा को प्रायमरी ग्लूकोमा भी कहते है इस अवस्था में आँखों में पाया जाने वाला तरल सूकने लगता है। जिसके कारण आँखों की केनाल ब्लॉग हो जाती है और ओप्टिकल नर्व पर प्रभाव बढ़ जाता है। यह ग्लूकोमा का सबसे कॉमन प्रकार हैं।

जन्मजात ग्लूकोमा
जन्मजात ग्लूकोमा से पैदा होने वाले बच्चों में उनकी आंख के कोण में एक दोष होता है, जो सामान्य द्रव जल निकासी को धीमा कर देता है या रोकता है। जन्मजात ग्लूकोमा आमतौर पर लक्षणों के साथ पाया जाता है, जैसे क्लाउडी आईज, प्रकाश की संवेदनशीलता। जन्मजात ग्लूकोमा एक परिवार से दूसरे परिवार में जा सकता है।
एक्यूट ग्लूकोमा
यह ग्लूकोमा की गंभीर अवस्था है इस अवस्था में आँखों को पोषण देने वाला सफेद द्रव्य बनना बंद हो जाता है, और आँखों में धुधला दिखाई देना या आँखों में दिखाई देना बंद हो जाता है। इस अवस्था में लक्ष्ण जैसे चककर आना, सर में दर्द, आखो का फूलजाना आदि दिखाई देने लगते है ।
सेकेंडरी ग्लूकोमा
यह ग्लूकोमा की सेकेंडरी अवस्था है ,इस अवस्था में ग्लूकोमा आँखों में घाव या सर्जरी या ट्यूमर के कारण होता है ।आँखों में गंभीर सक्रमण ग्लूकोमा का कारण बन जाता है।

नार्मल टेंशन ग्लूकोमा
इसके अतिरिक्त सामान्य तनाव के कारण भी ग्लूकोमा होने का खतरा हो सकता है क्योंकि अधिक तनाव की अवस्था में आँखों पर अधिक प्रभाव पड़ता है । जिससे हमारी आँखों की आप्टिकल नर्व कमजोर हो जाते है । ग्लूकोमा आमतोर पर किसी भी उम्र में हो सकता है बच्चो में ग्लूकोमा अधिकतर आनुवंशिकता के करण होता है। या कुछ बच्चो में ग्लूकोमा जन्मजात भी देखा जाता है।

न-एंगल ग्लूकोमा
ग्लूकोमा का सबसे आम प्रकार प्राथमिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा है। काला मोतियाबिंद होने पर धीरे-धीरे दृष्टि हानि को छोड़कर इसमें कोई विशेष संकेत या लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसी कारण से, यह महत्वपूर्ण है कि आप सालाना आँखों की जांच करायें ताकि आपके नेत्र रोग विशेषज्ञ, या आंख विशेषज्ञ, आपकी दृष्टि में किसी भी बदलाव की निगरानी कर सकें।

ग्लूकोमा के लक्षण

  • आँखों मे रौशनी का कम होना।
  • आँखों में दर्द होना और उनका लाल बने रहना।
  • सर में दर्द बने रहना साथ ही आँखों में भी सूजन बने रहना।
  • जी मचलना या बिना किसी कारण के उल्टी होना।
  • आँखों में धुधलापन छाना व रौशनी के चारो और रंग बिरंगे छल्ले दिखाई देना।
  • आँखों में सूखापन महसूस होना।
  • अचानक से कम दिखाई देने लगना।
  • ग्लूकोमा बी.पी तथा शुगर और हार्ट की बीमारी की अवस्था में अधिक देखा जाता है।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) का इलाज

  • आंख में कम दबाव के लिए आपका डॉक्टर आंखों की ड्राप, लेजर सर्जरी, या माइक्रोसर्जरी का उपयोग कर सकता है।
  • ग्लकोमा के शुरुआती लक्षण को पहचाना नहीं जा सकता है, परन्तु कुछ शुरुआती लक्षण जैसे आँखों की रौशनी का कम होना, आँखों के चश्मे का नंबर बदलना, आंखों से बार –बार पानी आना आदि।
  • आँखों की नियमित जाच करा कर ग्लूकोमा की अवस्था का पता लगाया जा सकता है।