GST की नई दरों को मंजूरी, बिल्डर्स को मिलेगा दो टैक्स स्लैब का विकल्प

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नई दिल्ली । जीएसटी काउंसिल ने मंगलवार की बैठक में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए की गई दरों में कटौती की व्यवस्था को लागू करने की योजना को मंजूरी दे दी है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में राजस्व सचिव ए बी पांडेय ने कहा कि राज्यों से बातचीत कर डिवेलपर्स को नई व्यवस्था के तहत आने के लिए जरूरी समय मुहैया कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिल्डर्स निर्माणधीन रिहायशी प्रोजेक्ट के लिए दो टैक्स स्लैब में किसी का चयन कर सकते हैं। काउंसिल की बैठक में बिल्डर्स को दो विकल्प दिए जाने का फैसला हुआ है। उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 12 फीसद का भुगतान करना होगा या फिर इनपुट टैक्स क्रेडिट के बिना उन्हें 5 फीसद टैक्स का भुगतान करना होगा।

वहीं किफायती हाउसिंग के मामले में उन्हें टैक्स छूट के साथ 8 फीसद का भुगतान करना होगा या फिर बिना छूट के 1 फीसद टैक्स का भुगतान करना होगा। बैठक में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए दरों में की गई कटौती की नई व्यवस्था को लागू करने और उससे जुड़े अन्य मसलों पर चर्चा की गई। चुनावी आचार संहिता लागू होने की वजह से बैठक में कोई नया फैसला नहीं लिया गया।

24 फरवरी को हुई पिछली बैठक में निर्माणाधीन फ्लैट्स के लिए जीएसटी दर को घटाकर पांच फीसद और किफायती श्रेणी के मकानों के लिए इस दर को घटाकर एक फीसद कर दिया गया था। नई दरें एक अप्रैल से लागू होंगी।अभी निर्माणाधीन फ्लैट्स के लिए होने वाले भुगतान पर जीएसटी की दर 12 फीसद है और इसके साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का प्रावधान भी है।

यही व्यवस्था ऐसे रेडी-टु-मूव-इन फ्लैट्स के लिए भी है, जिनके लिए बिक्री के वक्त कंप्लीशन सर्टिफिकेट्स जारी नहीं किए गए होते हैं। किफायती श्रेणी में आने वाली आवासीय इकाई के लिए अभी जीएसटी की दर आठ फीसद है। गौरतलब है कि जीएसटी वसूली फरवरी महीने में घटकर 97,247 करोड़ रुपये पर आ गई है, जो जनवरी में 1.02 लाख करोड़ रुपये रही थी।

फरवरी में हुई वसूली में सेंट्रल जीएसटी 17,626 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी 24,192 करोड़ रुपये, इंटीग्रेटेड जीएसटी 46,953 करोड़ रुपये और सेस 8,476 करोड़ रुपये का रहा। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीएसटी वसूली का लक्ष्य 13.71 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।