RTO के जुर्माने से खफा ट्रांसपोर्टरों ने किया कोटा स्टोन का लदान ठप

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कोटा। ओवरलोड वाहनों पर करोड़ों की पेनल्टी के चलते संभाग में कोटा स्टोन का लदान करने वाले 900 ट्रकों के पहिए थम गए हैं। इसकी वजह से हाड़ौती की 2200 से अधिक स्टोन फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया है। 60 से अधिक खदानों में भी काम बंद है। रोज 5 से 6 करोड़ का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इससे खान श्रमिकों, ट्रक चालकों समेत फैक्ट्रियों के 2 लाख कर्मचारियों के आगे संकट खड़ा हो गया है। वहीं कोटा स्टोन स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन इसके विरोध में बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है। स्टोन व्यापारी 14 मार्च को जयपुर में सीएम अशोक गहलोत से भी मिलेंगे। हाड़ौती कोटा स्टोन एसोसिएशन के चेयरमैन विकास जोशी ने बताया कि कोटा संभाग में जैसे-तैसे कोटा स्टोन का काम चलने लगा था, लेकिन अब ट्रकों पर जुर्माने से सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। इसका सीधा असर 70 से 80 हजार फैक्ट्री कर्मचारियों पर पड़ेगा।

परिवहन विभाग की ओर से जुर्माना लगाने के विरोध में लोकल ट्रक यूनियन ने सोमवार से ही खदान व स्टॉक से कोटा स्टोन का लदान बंद कर दिया है। इससे मंगलवार को दूसरे दिन भी लदान ठप रहा। खदान व स्टॉक पर सन्नाटा पसरा रहा। ट्रक मालिकों ने यूनियन अध्यक्ष कमल पारेता की अध्यक्षता में मंगलवार को रामगंजमंडी में बैठक की। इसमें परिवहन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई का विरोध जताया।

कोटा स्टोन एसोसिएशन के महासचिव रोहित सूद ने बताया कि कोटा शहर में कोटा स्टोन की करीब 300 फैक्ट्रियां हैं। कच्चा माल नहीं आने से 250 फैक्ट्रियों पर पूरी तरह से काम बंद हो गया है। दो दिन से श्रमिक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कोटा में 7 से 10 हजार कर्मचारियों पर संकट मंडरा गया है। एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने बताया कि मामला जल्द हल नहीं हुआ तो श्रमिकों को काम से हटाना पड़ेगा और भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए ओवरलोड वाहनों पर सख्ती करने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने नए नियम बनाए जिसके अनुसार 6 चक्के के ट्रक पर अधिकतम 9 टन माल लादा जा सकता है। 1 जनवरी 2018 से प्रदेश में ट्रकों के लिए ई-रवन्ना बनाने का नियम लागू कर दिया। इस सिस्टम में ट्रकों पर लोड सामान की ऑनलाइन एंट्री होती है। कोटा स्टोन ढुलाई में लगे ट्रकों में एक बार में 15 से 18 टन माल आता है। इसके चलते आरटीओ ने ओवरलोड ट्रकों पर प्रति ट्रिप औसतन 6 हजार का जुर्माना लगाना शुरू कर दिया।

जुर्माना जमा नहीं करने पर ट्रक का रजिस्ट्रेशन निरस्त
1 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर के बीच संभाग के 2800 ओवरलोड ट्रकों पर लगभग 200 करोड़ का जुर्माना लगा। इनमें से 900 ट्रक ऐसे हैं जो कोटा स्टोन का लदान करते हैं। 31 मार्च तक जुर्माना जमा नहीं करने पर ट्रक का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा।

कोटा में 300 से अधिक फैक्ट्रियां, 30 लाख का नुकसान
ट्रक मालिकों द्वारा ट्रकों का संचालन नहीं करने से कोटा संभाग की खदानों व स्टॉक पर सन्नाटा पसर रहा। स्टॉक से प्रतिदिन 900 गाड़ियों में रफ व पॉलिश स्टोन का लदान होता है, लेकिन मंगलवार को परिवहन विभाग के ओवरलोड जुर्माना लगाने से ट्रकों का संचालन नहीं हुआ। ऐसे में दिनभर खदानों व फैक्ट्रियों में सन्नाटा पसर गया।

रामगंजमंडी में 1500 फैक्ट्री, 4.5 करोड़ का कारोबार प्रभावित
रामगंजमंडी, चेचट, सुकेत व अन्य इलाकों में 1500 से अधिक फैक्ट्रियाें में 650 से अधिक ट्रक बंद हो गए हैं। यहां 40 से 50 हजार कर्मचारी हैं। क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 1500 ट्रक कोटा स्टोन का लदान होता है। आरटीओ ने 671 ट्रक मालिकों पर कुल 124 करोड़ रुपए जुर्माना किया है। प्रतिदिन 4.5 करोड़ का कारोबार होता है। यहां भी 30 से अधिक खाने हैं।

झालावाड़-झालरापाटन में बंद पड़ी हैं करीब 30 खदानें
झालावाड़-झालरापाटन के 293 ट्रक मालिकों पर परिवहन विभाग ने 43 करोड़ 60 लाख 73 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। ट्रक व्यवसायियों को भी 6 लाख रुपए प्रतिदिन के भाड़े का नुकसान हुआ है। झालावाड़-झालरापाटन क्षेत्र में करीब 30 खदानें हैं। झालावाड़ लाइम स्टोन खदानों से लोकल फैक्ट्रियों व रामगंजमंडी क्षेत्र में ट्रक मालिक पत्थर का लदान करते हैं।

ट्रक मालिक पेनल्टी के विरोध में भले ही प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन परिवहन विभाग ने भी साफ कह दिया है कि जुर्माना राशि जमा नहीं कराने पर ट्रक मालिक अपना वाहन मार्ग पर नहीं चला सकेंगे। उनके वाहनों की न तो फिटनेस होगी और न ही अन्य काम होंगे। इनका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा। वहीं, कोटा स्टोन खदानों व फैक्ट्रियों में लदान ठप होने से इसका मजदूरों पर भी पड़ेगा। इससे कोटा संभाग में करीब 2 लाख मजदूर प्रभावित होंगे।