10 लाख से ज्यादा की कारें और ज्वैलरी होगी सस्ती, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। अगर आप दस लाख रुपए से अधिक की कीमत वाली कार खरीदने या पांच लाख रुपए से ज्यादा की ज्वैलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो आपके लिए राहत की खबर है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (सीबीआईसी) ने साफ किया है कि जीएसटी की गणना करते समय टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) की राशि को इन वस्तुओं की कीमत में नहीं जोड़ा जाएगा। ऐसा होने पर ग्राहकों को इन वस्तुओं के लिए कम राशि खर्च करनी पड़ेगी।

आयकर कानून के तहत 10 लाख रुपए से अधिक का वाहन, पांच लाख रुपए से अधिक की ज्वैलरी और दो लाख रुपए से अधिक का सराफा खरीदने पर एक प्रतिशत की दर से टीसीएस काटना होता है। इसके अलावा अन्य तरह की खरीददारी पर भी टीसीएस अलग-अलग दर से लगता है।

टीसीएस की राशि कम होगी
सीबीआईसी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि जीएसटी की गणना करते समय वस्तु के मूल्य से टीसीएस की राशि को घटा दिया जाएगा। सीबीआईसी ने विभिन्न पक्षों की ओर से इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद सीबीडीटी के साथ चर्चा कर यह स्पष्टीकरण जारी किया है।

सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि टीसीएस किसी वस्तु पर टैक्स नहीं है बल्कि यह वस्तु की बिक्री के चलते होने वाली संभावित आय पर अंतरिम टैक्स को लेकर है। इससे पूर्व दिसंबर 2018 में सीबीआइसी ने कहा था कि जिन वस्तुओं पर टीसीएस वसूला जाना है ।

उन पर जीएसटी तय करते समय वस्तु के मूल्य में टीसीएस की राशि को जोड़ने के बाद जीएसटी की राशि तय की जाए। ऐसा होने पर जीएसटी की राशि अधिक हो जाती थी जिससे ग्राहक पर भार पड़ता था।

इसके अलावा, सीबीआईसी ने एक अन्य मामले में राहत देते हुए बॉय वन, गेट वन जैसे ऑफर पर भी जीएसटी में राहत दी है। सीबीआईसी का कहना है कि इस तरह के ऑफर में एक वस्तु की कीमत पर दो वस्तुएं दी जाती हैं, इसलिए इन पर अलग-अलग टैक्स लगाने का कोई मतलब नहीं है।

इसी तरह फ्री सैम्पल और गिफ्ट को भी जीएसटी कानून के तहत आपूर्ति न मानते हुए इसे भी जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का निर्णय किया गया है। इस निर्णय से दवा कंपनियों को राहत मिलेगी क्योंकि ये कंपनियां अपने उत्पाद सैंपल के तौर पर वितरित करती हैं।