लोकसभा चुनाव से बाजार में आएंगे करीब 15-16 हजार करोड़ रुपए

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों की तारीख का ऐलान हो गया है। चुनाव 7 चरणों में संपन्‍न होंगे। पहला चरण 11 अप्रैल को होगा और मतगणना 23 मई को होगी। चुनाव में हार-जीत किसी भी राजनैतिक पार्टी की हो, लेकिन आने वाले लोक सभा चुनाव से अर्थव्यवस्था को निश्चित रूप से बूस्ट मिलने जा रहा है। औद्योगिक संगठनों के मोटे अनुमान के मुताबिक सिर्फ लोक सभा चुनाव के दौरान बाजार में 15-16 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

इससे आर्थिक विकास की गति तेज होने में तो मदद मिलेगी, लेकिन महंगाई में भी बढ़ोतरी होगी। छोटे कारोबारियों के कारोबार में तेजी आएगी। चुनाव से फूड, एफएमसीजी सेक्टर, गारमेंट, ट्रांसपोर्ट, मीडिया जैसे सेक्टर में भारी खर्च के साथ छोटे कारोबारियों को फायदा होने जा रहा है।

क्या है गणित
लोकसभा चुनाव 543 सीट पर होगी। औद्योगिक संगठन एसोचैम के अनुमान के मुताबिक हर सीट के लिए कम से कम तीन उम्मीदवार गंभीर रूप से चुनाव लड़ रहे होते हैं। एसोचैम के मुताबिक चुनाव के दौरान उम्मीदवार की तरफ से किए जाने वाले खर्च का सटीक अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन ये उम्मीदवार औसतन 5-7 करोड़ रुपए खर्च करेंगे।

उनके अलावा जो छोटे-मोटे उम्मीदवार होते हैं, वे भी लाखों रुपए चुनाव में फूंक डालते हैं। उम्मीदवार की तरफ से होने वाले खर्च के अलावा सरकारी मशीनरी भी चुनाव के दौरान कई सौ करोड़ रुपये खर्च करती। इस प्रकार आगामी लोक सभा चुनाव में कम से कम 15-16 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

543 सीटों पर खर्च हो सकते हैं 2172 करोड़ रुपए
हालांकि चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक लोकसभा चुनाव लड़ने वाला एक उम्मीदवार चुनाव में अधिकतम खर्च 70 लाख रुपए कर सकता है। इस हिसाब से एक लोक सभा क्षेत्र में तीन-चार गंभीर उम्मीदवार के खर्च के साथ अन्य उम्मीदवारों के खर्च को शामिल कर लिया जाए तो यह 3-3.5 करोड़ रुपए होता है।

सरकार की तरफ से होने वाले खर्च को जोड़ दिया जाए तो लोक सभा की हर सीट के लिए अधिकतम 4 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस हिसाब से 543 सीटों के लिए 2172 रुपए खर्च होंगे। औद्योगिक संगठन पीएचडी चेंबर्स के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा कहते हैं, निश्चित रूप से चुनाव के दौरान होने वाले हजारों करोड़ रुपए के अतिरिक्त खर्च से विकास की गति को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे महंगाई में भी बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने बताया कि चुनाव के दौरान बाजार में जो पैसे आते हैं उनके अधिकतर हिस्से गैर उत्पादक चीजों में खर्च होते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के प्रोफेसर वित्त आयोग के सलाहकार मंडल में शामिल पिनाकी चक्रवर्ती ने बताया कि अभी यह कहना मुश्किल है कि चुनाव में होने वाले खर्च से विकास को कितनी गति मिलेगी, लेकिन इस दौरान सरकार की तरफ से विभिन्न प्रकार की सब्सिडी देने व सरकारी खर्च से राजकोषीय घाटे बढ़ जाते है।