आतंकवाद को लेकर सख्ती हुई, तो रोने लगा पाकिस्तान पैसों का रोना

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में मदरसों की आड़ में आतंकवाद की फैक्ट्री चलाई जाती है। यह किसी से ढका-छुपा नहीं है। आतंकवाद की ऐसी ही एक फैक्ट्री जैश की ओर से बालाकोट में चलाई जा रही थी, जिसे भारतीय एयरफोर्स ने तबाह कर दिया था। पाकिस्तान में मदरसों के बच्चों को जिहाद सिखाया जाता है, जो भारत के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि जब पाकिस्तान पर आतंकवाद को मदरसों के जरिए मिलने वाली वित्तीय सहायता को लेकर सवाल उठने लगे। साथ ही आंकवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदायन ने पाकिस्तान पर दबाव डाला, तो पाकिस्तानी सरकार ने दिसंबर 2018 में ऐलान किया कि वो प्रतिबंधित मदरसों को अपने कब्जे में लेना और इन बच्चों को पैरा मिलिट्री फोर्स में शामिल करेगा।

इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से अब तक इन मदरसों के खिलाफ ऐसी कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। पाकिस्तान के पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट करके कहा कि सरकार पैसों की कमी की वजह से पिछले साल सरकार ऐसा करने में नाकाम रही थी। लेकिन इस साल के बजट में प्रतिबंधित मदरसों को सरकारी कब्जे में लेने का फंड जारी किया जाएगा।

प्रतिबंधित संगठनों की संपत्ति होगी जब्त
पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने एक आर्डर जारी किया गया है, जिसमें यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से प्रतिबंधित किए गए संगठनों की संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। इस मामले में सोमवार को पाकिस्तान इंटीरियर मिनिस्ट्री में एक अहम बैठक हुई, जहां ये निर्णय लिया गया। हालांकि पाकिस्तान की ओर से जैश ए मोहम्मद संगठन के खिलाफ कार्रवाई पर कोई जवाब नहीं दिया।