उद्योगों के विकास के लिए नई सरल औद्योगिक नीति बने: माहेश्वरी

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कोटा। कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि नई औद्योगिक नीति सरल बने। नई तकनीकी के उद्योग के लिए उद्यमियों को सरकारी स्तर पर प्रशिक्षित किया जाए। इससे नई तकनीकी के उद्योग यहां आ सके। उन्‍होंने रुग्ण औद्योगिक इकाइयों के पुनः उत्थान के लिए बिना ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने व बकाया ऋण पर ब्याज माफी की मांग की।

वे मंगलवार को पुरुषार्थ भवन में जिला उद्योग केंद्र की ओर से राज्य सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना के तहत आयोजित संभाग स्तरीय औद्योगिक प्रोत्साहन शिविर को सम्बोधित कर रहे थे। एग्रो फूड पार्क एसोसिएशन के सचिव डीसी जैन ने बताया कि कोटा रानपुर औद्योगिक क्षेत्र में मंडी यार्ड की स्थापना की जाए। यहां लहसुन की पैदावार अधिक होती है। इस पर आधारित उद्योगों की संभावनाएं प्रबल है। राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति में अपेक्षित सहयोग, सब्सिडी देकर उद्योग के लिए उद्यमियों को प्रेरित कर सकती है।

मंडी शुल्क का कोई औचित्य नहीं :इसके अतिरिक्त जब जीएसटी लागू हो गया है तो मंडी शुल्क का कोई औचित्य नहीं रहता। कृषि जिन्सों पर मंडी टैक्स हटाया जाए। अंत में दी एसएसआई एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएल गुप्ता ने आभार जताया। शिविर में अमित बंसल, राजेन्द्र जैन, विपिन सूद, आरएन गर्ग, मुकेश त्यागी, सुरेश मित्तल आदि मौजूद रहे।

नियमों के सरलीकरण की आवश्यकता : दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने पीपीपी मोड पर औद्योगिक क्षेत्रों विकसित करने, गुजरात की तर्ज पर स्पेशल इकॉनोमिक रीजन स्थापित करने, ग्रामीण औद्योगिक क्षेत्रों के लिए इंडस्ट्रीयल फीडर, रीको को निजी खातेदारों की जमीन को सीधे ही अवाप्ति के अधिकार, एसएस/एसटी की भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए उपयोग में लेने की अनुमति देने आदि के बारे में अवगत कराया।

रीको के प्रचलित नियमों के सरलीकरण की आवश्यकता बताई। पुराने औद्योगिक क्षेत्र अब शहर के बीच आ चुके है। उनके कामर्शियल प्रयोजनार्थ भूमि कन्वर्जन की अनुमति दी जाए। कोटा की भूमि पथरीली होने के बावजूद भी यहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम उद्यमियों पर थोपा जा रहा है जो अनुचित है। इसके अतिरिक्त बहुमंजिला औद्योगिक इमारतें बनाने की आवश्यकता है। इससे कम स्थान पर ज्यादा से ज्यादा उद्योग स्थापित किए जा सके।

इनको दिया लाभ : शिविर में जिला उद्योग केन्द्र कोटा ने भामाशाह रोजगार योजना के तहत 7 लाभार्थियों को 64 लाख, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत 9 अभ्यर्थियों को 40 लाख 60 हजार एवं चर्मकार शिल्प योजना के तहत 90 हजार के ऋण स्वीकृत किए। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा 5 लाभार्थियों को 24 लाख के स्वीकृति पत्र दिए।

इसी प्रकार राजस्थान वित्त निगम द्वारा युवा उद्यमियता प्रोत्साहन योजना के तहत प्रियंका मित्तल को 1 करोड़ 27 लाख ऋण स्वीकृति किया गया। अभ्यर्थी अशोक सुवालका को 20 लाख ऋण वितरित किया गया। कैथून के 12 बुनकरों को बुनकर कार्ड जारी किए गए। रूडसेटी द्वारा 22 प्रशिक्षणार्थियों को उद्यमियता विकास प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक संजीव सक्सेना ने बताया कि राज्य सरकार की 100 दिवसीय कार्य योजना के तहत व नई औद्योगिक नीति बनाने के क्रम में उद्योग संघ व उद्यमियों को उनके बहुमूल्य सुझाव के लिए आमंत्रित किया है। सत्र में औद्योगिक विकास को किस प्रकार से गति मिले। इस पर चर्चा की गई।

शिविर में जिलाउद्योग केंद्र कोटा के महाप्रबंधक वाईएन माथुर, जिला उद्योग केन्द्र बूंदी के महाप्रबंधक चन्द्रमोहन गुप्ता एवं राजस्थान वित्त निगम कोटा के अधिकारी आदि मौजूद थे।