जानिए क्यों नहीं घटी आपके लोन की ईएमआई

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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस महीने अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए रीपो रेट में 0.25% की कटौती की थी। रीपो रेट, यानी बैंकों को आरबीआई से जिस ब्याज दर पर फंड मिलता है। आरबीआई को उम्मीद थी कि बैंक सस्ते लोन का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएंगे।

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने नए होम लोन पर ब्याज दरों में महज 0.05% की बेहद मामूली कटौती की और एमसीएलआर में कोई बदलाव नहीं किया जिसके आधार पर सभी पुराने और नए लोन के ब्याज दर तय होते हैं। अक्सर बाकी बैंक एसबीआई का ही अनुकरण करते हैं।

कर्ज बनाम जमा
बैंकों के एमसीएलआर इस बात पर निर्भर भी करते हैं कि बैंक अपने पास जमा रकम पर किस दर से ब्याज दे रहे हैं। इसलिए, एमसीएलआर में कटौती के लिए उन्हें डिपॉजिट रेट्स में भी कटौती करना होता। चूंकि बैंकों में जमा रकम में वृद्धि की रफ्तार (6.1%) कर्ज देने की रफ्तार (9.3%) के मुकाबले कम है, इसलिए वे जमा रकम बढ़ाने के लिए डिपॉजिट रेट्स ऊंची रखने को मजबूर हैं। एसबीआई का कहना है कि वह डिपॉजिट रेट्स में कटौती इसलिए नहीं कर सकता क्योंकि दूसरे बैंक ऊंची दर ऑफर कर रहे हैं।

कहां है जमा धन?
देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक के सीईओ आदित्य पुरी का कहना है, ‘बड़ी मात्रा में करंसी के सर्कुलेशन में रहने के कारण बैंकों के पास नकदी की कमी हो गई है। लोग म्यूचुअल फंड्स में और ऊंची ब्याज दरों वाली छोटी बचत योजनाओं में निवेश कर रहे हैं।’ इसलिए, बैंकों के लिए डिपॉजिट रेट्स कम करने का मतलब है कि जो लोग उनके पास पैसे जमा करवा रखे हैं या छोटी बचत योजनाओं में निवेश कर रखा है, उसमें कमी आ जाएगी।

आगे क्या?
आरबीआई गवर्नर इस मुद्दे पर बातचीत के लिए गुरुवार को सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक प्रमुखों से मिलने वाले हैं। वह सस्ते ब्याज दर का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि, बैंकों का कहना है कि ब्याज दर घटाने के लिए अप्रैल महीने में आने वाली नई मौद्रिक नीति में फिर से रेट कट का इंतजार करना होगा।

अगर डिपॉजिट रेट्स में कटौती नहीं की जाती है तो आरबीआई को अपने पास पड़े बैंकों के जमा धन में कटौती करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि बैंकों को अपने पास जमा रकम का एक हिस्सा आरबीआई के पास जमा कराना पड़ता है या कुछ खास सिक्यॉरिटीज में निवेश करना पड़ता है।