अनिल की दिवालिया कंपनी भी भरेगी मुकेश अंबानी की झोली

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नई दिल्ली। 45 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज में डूबी अनिल अंबानी (Anil Ambani) की रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) यानी Rcom भले ही दिवालिया होने जा रही है, लेकिन इसे भी उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऐसा होता है तो देश के सबसे अमीर शख्स के पास दिवालिया कंपनी Rcom को सस्ते में खरीदने का मौका मिलेगा, जिसकी एसेट्स खरीदने के लिए लिए पहले उन्होंने 17300 करोड़ रुपए की डील की थी।

5 रुपए का रह गया आरकॉम का स्टॉक
आरकॉम (Rcom) ने शुक्रवार को दिवालियापन की प्रोसीडिंग में जाने का ऐलान किया था। इसके बाद से ही कंपनी का शेयर लगातार गिर रहा है। शुक्रवार को आरकॉम का क्लोजिंग प्राइस लगभग 12 रुपए था, जो अब मंगलवार को घटकर 5 रुपए के आसपास रह गया है। इसके चलते बीते दो दिन में कंपनी की मार्केट वैल्यू 4 हजार करोड़ रुपए से घटकर 1500 करोड़ रुपए रह गई है।

कैसे अटक गई 17300 करोड़ रु की डील
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते शुक्रवार को मुंबई में कोर्ट ने आरकॉम की दिवालियापन की अर्जी स्वीकार कर ली थी, जिससे उन्हें कर्ज रिपेमेंट करने या लिक्विडेट (एसेट बेचने) के लिए 270 दिन का वक्त मिलेगा।

कंपनी ने मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के स्वामित्व वाली रिलायंस जियो (Reliance Jio Infocomm Ltd) के साथ टावर, स्पेक्ट्रम और फाइबर एसेट्स बेचने के लिए हुई डील के अटकने के बाद इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दोनों भाइयों की कंपनियों के बीच हुई 17300 करोड़ रुपए की डील को क्रेडिटर्स की तरफ से आपत्तियों और मुकदमों का सामना करना पड़ा था।

ऐसे होगा मुकेश अंबानी को फायदा
माना जा रहा है कि मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) को ऐसी कंपनी के लिए बिडिंग फायदेमंद हो सकती है, जिसके डूबने से उनकी रिलायंस जियो (Reliance Jio) को वर्ष 2016 में आगाज के बाद ग्रोथ की राह पर आगे बढ़ने में मदद मिली थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक Reliance Jio की फ्री सर्विसेस भी आरकॉम के डूबने के पीछे बड़ी वजह रही।

कोर्ट ने बदला नियम
गौरतलब है कि शीर्ष कोर्ट ने जनवरी में उन नियमों में बदलाव कर दिया था, जिसके चलते दिवालियापन की प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनी की कंट्रोलिंग स्टेक के लिए फैमिली मेंबर्स बोली नहीं लगा सकते थे। अब मुकेश अंबानी के सामने आरकॉम की एसेट्स के लिए बोली लगाने में कोई बाधा नहीं है।

नीलामी में घट सकती है आरकॉम की कीमत
एक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘अगर आरकॉम नीलाम होती है तो उसकी वैल्यू काफी कम हो जाएगी। ऐसे में बिडर्स इनसॉल्वेंसी प्रोसेस के दौरान क्रेडिटर्स के साथ तगड़ा मोलभाव कर सकते हैं और कीमतों को नीचे ला सकते हैं।’