डाकघरों में पड़े 9,000 करोड़ रुपये का कोई दावेदार नहीं

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नई दिल्ली। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश के डाकघरों में पड़ी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का कोई दावेदार नहीं है। यह रकम इतनी है कि केंद्र सरकार अगर इसमें 600 करोड़ रुपये मिला दे, तो इससे गगनयान प्रॉजेक्ट की फंडिंग की जा सकती है।

ये रकम डाक विभाग की छह स्मॉल सेविंग्स स्कीमों- किसान विकास पत्र, मंथली इनकम स्कीम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, रेकरिंग डिपॉजिट और टाइम डिपॉजिट में पड़े हैं। कुल रकम 9,395 करोड़ रुपये हैं।

साइलेंट’ मनी
डाकघर के अधिकारियों का कहना है कि अपने यहां पड़े लावारिस पैसों को बैंक या तो अनक्लेम्ड अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं या फिर डिपॉजिट अवेयरनेस ऐंड एजुकेशन फंड (डीईएएफ) में डाल देते हैं, जिसके जरिये जमाकर्ताओं के लिए फाइनैंशल लिट्रेसी प्रोग्राम का संचालन किया जाता है। लेकिन बैंकों की तरह डाकघर इन पैसों का इस तरह से इस्तेमाल नहीं कर सकते। इन खातों में पड़े लावारिस पैसों को अन्कलेम नहीं, बल्कि साइलेंट कहा जाता है।

किन राज्यों में सर्वाधिक लावारिस पैसे
पश्चिम बंगाल के डाकघरों में सर्वाधिक 1,591 करोड़ रुपये (17%), दिल्ली में 1,112 करोड़ रुपये (12%) तथा पंजाब में 1,034 करोड़ रुपये (11%) लावारिस पड़े हैं। इनके अलावा, उत्तर प्रदेश के डाकघरों में 806 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र में 727 करोड़ रुपये, कर्नाटक में 259 करोड़ रुपये और गुजरात में 538 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं।