एकता कपूर भी सरोगेसी तकनीक से बनीं मां

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बॉलिवुड के कई लोगों और अपने भाई तुषार कपूर के नक्शे-कदम पर चलते हुए जितेंद्र की बेटी एकता कपूर सरोगेसी के जरिए एक बच्चे की मां बन गईं हैं। बताया जा रहा है कि बच्चे का जन्म 27 जनवरी को हुआ है और इसके बाद ही एकता के पास पूरे बॉलिवुड से बधाइयां आने लगी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एकता कई मौकों पर कह चुकी हैं कि वह शादी नहीं करना चाहती हैं लेकिन जब तुषार के बेटे लक्ष्य का जन्म हुआ था। तभी उन्होंने मां बनने की इच्छा जरूर जाहिर की थी।

उन्होंने कहा था कि वह जब जिम्मेदारी उठाने लायक हो जाएंगी तब मां बनना चाहेंगी। इससे पहले तुषार कपूर के अलावा करण जौहर भी सरोगेसी के जरिए जुड़वां बच्चों के पिता बन चुके हैं। तुषार के पिता बनने के बाद से ही एकता का इंस्टाग्राम उनके भतीजे की तस्वीरों से भरा हुआ रहता है। इससे पता चलता है कि एकता को अपने बच्चों से कितना प्यार है।

सरोगेसी क्या है
सरोगेसी एक ऐसा जरिया है जो किसी को भी संतान की खुशी हासिल करने में मदद करता है। इस लेटेस्ट टेक्निक को अपनाकर आप भी माता-पिता होने का सुख भोग सकते हैं। जी हां, सरोगेसी एक महिला और एक दंपति के बीच का एक एग्रीमेंट होता है, जो अपना खुद का बच्चा चाहता है। सामान्य शब्दों में अगर कहे तो सरोगेसी का मतलब है कि बच्चे के जन्म तक एक महिला की ‘किराए की कोख’।

यूं तो सरोगेसी की टेक्निक उन लोगों के लिए बनाई गई है जिन लोगों को खुद के बच्चे पैदा करने में मुश्किलें आती है। कभी किसी को बच्चे को जन्म देने में कठिनाई आती है, तो कभी बार-बार गर्भपात हो रहा हो या फिर बार-बार आईवीएफ तकनीक फेल हो रही हो। जो महिला किसी और दंपति के बच्चे को अपनी कोख से जन्म देने को तैयार हो जाती है उसे ही ‘सरोगेट मदर’ के नाम से जाना जाता है।

ट्रेडिशनल सरोगेसी
इस सरोगेसी में सबसे पहले पिता के शुक्राणुओं को एक अन्य महिला के अंडाणुओं के साथ निषेचित किया जाता है, जिसमें जैनेटिक संबंध सिर्फ पिता से होता है।

जेस्टेंशनल सरोगेसी
इसमें माता-पिता के अंडाणु व शुक्राणुओं का मेल परखनली विधि से करवा कर भ्रूण को सरोगेट मदर की बच्चेदानी में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। इस विधि में बच्चे का जैनेटिक संबंध माता-पिता दोनों से होता है। इस प्रकार की सरोगेसी में, सरोगेट मां का बच्चे के साथ कोई भी आनुवंशिक संबंध नहीं होता है। इस प्रकिया में सरोगेट मां के अंडे का इस्तेमाल नहीं किया जाता है और जैविक रूप से बच्चे का संबंध अंडा देने वाले या इच्छित माता-पिता से होता है।