मोदी सरकार का DBT से 1.1 लाख करोड़ रुपये की बचत का दावा

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नई दिल्ली। सरकार ने लाभार्थियों को कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे उसके बैंक खाते में भेजकर जो बचत की है, वह लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये के लेवल तक पहुंच गई है। इसका पता 31 दिसंबर 2018 तक अपडेटेड डेटा से चला है।

सरकार ने कहा है कि उसे इतने लाख करोड़ की बचत लगभग 8 करोड़ फर्जी लाभार्थियों को रिकॉर्ड से हटाने की वजह से हुई है। अपडेटेड डेटा उस समय आए हैं जब सरकार किसानों को सब्सिडी का लाभ देने और मुमकिन तौर पर यूनिवर्सल बेसिक इनकम फ्रेमवर्क के लिए DBT का रास्ता अपनाने के बारे में सोच रही है।

हालिया डेटा के मुताबिक, 31 दिसंबर 2018 तक सरकार को डीबीटी के जरिए 1 लाख 9 हजार 983 करोड़ रुपये की बचत हुई थी जो 31 मार्च 2018 को 90 हजार करोड़ रुपये थी। इसका मतलब यह हुआ कि सरकार को डीबीटी के जरिए एक साल में 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई थी।

अब तक डीबीटी के जरिए कुल 6 लाख 5 हजार 900 करोड़ रुपये की सब्सिडी बांटी जा चुकी है। सरकार के एक सीनियर अफसर ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर ईटी से कहा, ‘आंकड़े बताते हैं कि सरकार को डीबीटी के चलते बांटी गई सब्सिडी के छठे हिस्से की बचत हुई है।

सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी 2019 के चुनाव प्रचार में इस आंकड़े को उपलब्धि की तरह पेश करते हुए कह सकती है कि उसने भ्रष्टाचारमुक्त सरकार देकर जनता का पैसा बचाया है।’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में 22 जनवरी को हुए 15वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में डीबीटी के जरिए लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा कराई गई रकम के बाबत जो कहा था, अपडेटेड डेटा उससे कहीं ज्यादा हैं।

उन्होंने कहा था कि डीबीटी के जरिए लाभार्थिों के बैंक अकाउंट में 5 लाख, 80 हजार करोड़ रुपये डाले गए हैं और पब्लिक के पैसे की लूट रोकने के लिए 7 करोड़ फर्जी लाभार्थियों रिकॉर्ड से हटाए गए हैं। सम्मेलन में मोदी ने कहा था, ‘एक पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर दिल्ली से एक रुपया भेजा जाता है तो उसमें से सिर्फ 15 पैसे ही गांव तक पहुंचता है।

दुर्भाग्य से पार्टी ने उसके 10-15 साल के शासन में लूट या लीकेज रोकने के लिए कुछ नहीं किया।’ उन्होंने कहा था कि रिकॉर्ड से जो 7 करोड़ फर्जी लाभार्थी हटाए गए हैं, वह ब्रिटेन, फ्रांस या इटली की आबादी के बराबर है।

हालिया डेटा के मुताबिक सरकार ने दावा किया है कि सिस्टम से ऐसे 4.09 करोड़ ड्युप्लीकेट या फर्जी एलपीजी कनेक्शन हटाए गए हैं, जिन पर फर्जी तरीके से गैस सिलेंडर सब्सिडी ली जा रही थी। डीबीटी के जरिए इससे अब तक 56 हजार 400 करोड़ रुपये की बचत हुई है और यह इस रूट के जरिए अब तक हुई बचत के आधे के बराबर है।