कोचर दंपती के खिलाफ क्लोज हो गया केस, फिर कैसे खुला, जानिए

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मुंबई। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ प्राथमिक जांच यानी (प्रेलिमिनरी इन्क्वायरी या पीई) बंद करने का फैसला किया था। जब सबूत के अभाव में पीई क्लोज करने का फैसला किया गया था, उसके कुछ हफ्ते बाद ही कोचर दंपती के साथ-साथ विडियोकॉन ग्रुप के महानिदेशक (मैनेजिंग डायरेक्टर या एमडी) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।

शुरुआती जांच में नहीं मिले थे पर्याप्त सबूत
जांच टीम का हिस्सा रहे डेप्युटी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) जसबीर सिंह और सुप्रिन्टेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) सुधांशु मिश्रा ने जांच अधिकारी (इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर या आईओ) डीजी बाजपेयी की शुरुआती अनुशंसा (इनिशल रिकॉमेंडेशन) पर सहमति जताई थी। दिसंबर 18 में दी गई इस अनुशंसा में कहा गया था कि कोचर दंपती के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

बंद हो गई थी जांच
मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर LEN DEN NEWS को बताया, ‘आईओ ने दिसंबर महीने में जो रिपोर्ट अपने सीनियर को सौंपी थी, उसमें उन्होंने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद मामले से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन किया गया था।’ उन्होंने आगे बताया, ‘जांच के दौरान चंदा कोचर और उनके देवर राजीव कोचर समेत शिकायत से जुड़े कुछ लोगों से पूछताछ की गई थी, लेकिन इस दौरान शिकायत को एफआईआर में तब्दील करने का कोई आधार नहीं मिला और जांच बंद कर दी गई।’

डायरेक्टर ने की अनुशंसा की अनदेखी
इस अधिकारी ने कहा कि ‘आईओ की रिपोर्ट पर डीआईजी और एसपी, दोनों ने सहमति जताई’ और उसके बाद इसे अप्रूवल के लिए कार्यकारी निदेशक (ऐक्टिंग डायरेक्टर) एम. नागेश्वर राव के पास भेजा गया। उन्होंने कहा, ‘पिछले सप्ताह डायरेक्टर ने इस मामले पर BS&FC की अनुशंसा के विपरीत फैसला लिया। उन्हें लगा कि शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और सीबीआई ने ऐसा ही किया।’

नागेश्वर राव का विपरीत फैसला
इस तरह, सीबीआई डायरेक्टर का कार्यभार संभाल रहे एम. नागेश्वर राव ने इस शुरुआती अनुशंसा को रद्द कर दिया और मामले में एक फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया जिसमें 2012 में ‘बेईमानी की नीयत से विडियोकॉन ग्रुप को लोन सैंक्शन करने’ का मामला बताया जाए। इस मामले से वाकिफ लोगों ने यह बात ईटी को बताई।

जेटली का दखल
एफआईआर 22 जनवरी को दर्ज की गई और 24 जनवरी को सीबीआई की टीम ने महाराष्ट्र में चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर दी। उसके अलगे ही दिन अमेरिका में इलाज करा रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एफआईआर में टॉप बैंकरों को नामित करने पर नाराजगी प्रकट करते हुए सीबीआई को अपनी कार्रवाई में रोमांच ढूंढने की जगह निष्पक्ष जांच की नसीहत दी।

इसके बाद रविवार को डीआईजी जसबीर सिंह से बैंक सिक्यॉरिटी ऐंड फ्रॉड्स सेल (BS&FC) की अतिरिक्त जिम्मेदारी वापस ले ली गई, जहां ICICI केस में पीई दायर किया गया था। साथ ही, एसपी सुधांशु मिश्रा को रांची की आर्थिक अपराध शाखा में तबादला कर दिया गया।

छापेमारी की सूचना लीक करने का संदेह
कुछ अन्य लोगों का कहना है कि जांच कर रहे कुछ सीबीआई अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर देरी की और आरोपियों के ठिकानों की होने वाली तलाशियों से जुड़ी गुप्त सूचनाएं लीक कर दीं। इन लोगों के मुताबिक, एसपी सुधांशु मिश्रा को हटाने से पहले अच्छे से जांच की गई जिसमें आरोपियों के यहां होने वाली छापेमारियों से जुड़ी जानकारियां लीक होने की मजबूत आशंका सामने आई।