चंदा कोचर के खिलाफ फिलहाल मनी लांड्रिंग का केस नहीं चलेगा

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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय वीडियोकॉन लोन घोटाले में आइसीआइसीआइ बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के खिलाफ फिलहाल मनी लांड्रिंग का केस दर्ज नहीं करेगा। चंदा कोचर के खिलाफ कार्रवाई पर सीबीआइ को केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की तल्ख नसीहत को देखते हुए ईडी ने मनी लांड्रिंग का केस नहीं दर्ज करने का फैसला किया है। ध्यान देने की बात है कि ईडी वित्त मंत्रालय के मातहत आता है और इलाज के लिए अमेरिका रवाना होने तक अरुण जेटली ही वित्तमंत्री थे।

दरअसल भ्रष्टाचार के सभी बड़े मामलों में पुलिस या सीबीआइ की एफआइआर के बाद ईडी मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत केस दर्ज करती है। ईडी का काम भ्रष्टाचार से बनाई गई अवैध कमाई का पता लगाकर उसे जब्त करने का होता है।

चंदा कोचर के खिलाफ सीबीआइ की एफआइआर में वीडियोकॉन की एक कंपनी से उनके पति दीपक कोचर की कंपनी में 64 करोड़ रुपये दिये जाने को रिश्वत की रकम बताया गया है।
ईडी के अधिकारी सीबीआइ से एफआइआर की प्रति मंगाकर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज करने का मन बना रहे थे, ताकि रिश्वत की इस रकम को जब्त किया जा सके। लेकिन अरुण जेटली की कड़ी टिप्पणी के बाद ईडी ने फिलहाल सीबीआइ जांच के आगे बढ़ने तक इंतजार करने का फैसला लिया है।

अमेरिका में इलाज करा रहे अरुण जेटली ने सीबीआइ को तल्ख नसीहत देते हुए कहा कि पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है। उनके अनुसार आइसीआइसीआइ मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची से साफ है कि जांच एजेंसी लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय अंतहीन यात्रा के रास्ते पर चल पड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि बैंकिंग उद्योग से हर किसी को बिना सबूत के जांच में शामिल करने लगेंगे तो इससे कुछ हासिल होने क बजाय वास्तव में नुकसान ही होगा।

माना जा रहा है कि अरुण जेटली का इशारा सीबीआइ की एफआइआर में उन नामों की तरफ था, जो वीडियोकॉन को दिये जाने वाले लोन को मंजूर करने वाली समिति के सदस्य थे। सीबीआइ वीडियोकॉन के आठ लोन में गड़बड़ी की जांच कर रही है, जिनमें केवल दो लोन की समिति में खुद चंदा कोचर एक सदस्य के रूप में थे। यदि सभी समिति से सभी सदस्यों को पूछताछ के बुलाया गया, तो देश के कई बड़े बैंकर निशाने पर आ जाएंगे। इससे बैंकिंग सेक्टर में कोहराम तो मचेगा ही सीबीआइ के लिए भी जांच का अंतहीन सिलसिला शुरू हो जाएगा