गायों के बीच विराजे ठाकुर जी, लगी दर्शनार्थियों की लम्बी कतारें

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कोटा। पुष्टिमार्ग के प्रथम निधि स्वरूप बड़े मथुराधीश प्रभु के पुष्टि महोत्सव और लालन कृष्णास्य बावा के उपनयन संस्कार महोत्सव के चौथे दिन मंगलवार को श्री प्रथमेश नगर छप्पन भोग परिसर पर ठाकुर जी के गौचारण के दर्शन हुए। इस दौरान ठाकुर जी गायों के बीच विराजकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे।

भगवान मथुराधीश जी के गौचारण के रूप में दर्शन के लिए शाम से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। वल्लभ सम्प्रदाय के गुरू मिलन गोस्वामी ने कहा कि सातों निधियों में गौचारण के मनोरथ का बड़ा महत्व है। प्रभु का गोचारण कालीन ग्वाल वेष धन्य है।

अपने प्रभु को देखकर भक्त भाव मंत्रमुग्ध हो रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो वेणु बजाकर प्रभु गायों को अपनी और बुला रहे हैं, प्रभु के वेणु वादन से समस्त चराचर जीव मुग्ध हैं, श्री कृष्ण की ग्वाल मंडली नृत्य, गीत आदि पवित्र लीला में तल्लीन है, वेणुनाद सुनकर सरोवर में सारस, हंस आदि मौन धारणकर तथा नयन मूंदकर तन्मय हो रहेे हैं।

वृंदावन की द्रुमलताएं मधु धारा बरसा रही हैं। प्रभु श्रीकृष्ण लीला पूर्वक इठलाते हुए चल रहे हैं। ठाकुर जी भी ब्रज भूमि का मर्दन कर दुःख दूर कर रहे हैं। ऐसी अलौकिक छटा को देखकर हर कोई भाव विभोर सा मथुराधीश भगवान को निहारता जा रहा था। इस दौरान विठ्ठलनाथ महाराज, मिलन गोस्वामी बावा और लालन कृष्णास्य बावा भी पधारे।

इससे पहले 100 से अधिक गौमाताओं को स्नान कराकर नए अंगवस्त्र माला, फूल, रोली, चंदन, आरती, अर्चन के द्वारा पूजन किया गया। जिनके बीच ठाकुर जी ग्वाले के वेश में विराजमान हुए तो ठाकुर जी की एक झलक पाने को शहरवासी उमड़ पड़े। लम्बी कतारों के बावजूद दर्शनार्थियों को शांतिपूर्वक दर्शनों का लाभ मिला।इसके लिए विशेष प्रकार की व्यवस्थाएं की गई थीं।

छप्पन भोग के दर्शन
मिलन बावा ने बताया कि बुधवार को सेवानुकूल समय शाम 5 बजे से छप्पन भोग के दर्शन होंगे। जिसमें सैंकड़ों प्रकार के व्यंजनों के साथ प्रभु के मनोरथ के दर्शनों का लाभ मिलेगा। इससे पहले सुबह 7.30 बजे से मंगला के दर्शन भी होंगे।