‘टिक-टॉक’ भी बन रहा लोगों की कमाई का जरिया, जानिए कैसे

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    अब यूट्यूब की तरह ‘टिक-टॉक’ भी लोगों की कमाई का जरिया बन रहा है। भारत में टिक-टॉक के डाउनलोड का आंकड़ा 100 मिलियन से ज्यादा है। सवाल यह है कि आखिर ये टिक टॉक है क्या और इसमें ऐसा क्या है जिसके पीछे सब पागल हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि टिक-टॉक की दीवानगी सात-आठ साल की उम्र के छोटे-छोटे बच्चों के तक के सिर चढ़कर बोल रही है।

    टिक-टॉक’ एक सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन है जिसके जरिए स्मार्टफोन यूजर छोटे-छोटे वीडियो (15 सेकेंड तक के) बना और शेयर कर सकते हैं। ‘बाइट डान्स’ इसके स्वामित्व वाली कंपनी है जिसने चीन में सितंबर, 2016 में ‘टिक-टॉक’ लॉन्च किया था। साल 2018 में ‘टिक-टॉक’ की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी और अक्टूबर 2018 में ये अमरीका में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया।

    गूगल प्ले स्टोर पर टिक-टॉक का परिचय ‘Short videos for you’ (आपके लिए छोटे वीडियो) कहकर दिया गया है। प्ले-स्टोर पर टिक-टॉक को परिभाषित कहते हुए लिखा गया है- टिक-टॉक मोबाइल से छोटे-छोटे वीडियो बनाने का कोई साधारण जरिया नहीं है। इसमें कोई बनावटीपन नहीं है, ये रियल है और इसकी कोई सीमाएं नहीं हैं। टिक-टॉक पर आइए और 15 सेकेंड में दुनिया को अपनी कहानी बताइए।

    भारत में टिक-टॉक के डाउनलोड का आंकड़ा 100 मिलियन से ज्यादा है। एक रिपोर्ट के अनुसार इसे हर महीने लगभग 20 मिलियन भारतीय इस्तेमाल करते हैं। भारतीयों में टिक-टॉक की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आठ मिलियन लोगों ने गूगल प्ले स्टोर पर इसका रिव्यू किया है। दिलचस्प बात ये है कि ‘टिक-टॉक’ इस्तेमाल करने वालों में एक बड़ी संख्या गांवों और छोटे शहरों के लोगों की है।

    आवाज का इस्तेमाल नहीं
    टिक-टॉक से वीडियो बनाते वक्त आप अपनी आवाज का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आपको ‘लिप-सिंक’ करना होता है। जहां फेसबुक और ट्विटर पर ‘ब्लू टिक’ पाने यानी अपना अकाउंट वेरिफाई कराने के लिए आम लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ती है वहीं, टिक-टॉक पर वेरिफाइड अकाउंट वाले यूजर्स की संख्या बहुत बड़ी है। और हां, इसमें ‘ब्लू टिक’ नहीं बल्कि ‘ऑरेंज टिक’ मिलता है। जिन लोगों को ‘ऑरेंज टिक’ मिलता है उनके अकाउंट में ‘पॉपुलर क्रिएटर’ लिखा दिखाई पड़ता है।

    कमाई का जरिया
    साथ ही अकाउंट देखने से ये भी पता चलता है कि यूजर को कितने ‘दिल’ (Hearts) मिले हैं, यानी अब तक कितने लोगों ने उसके वीडियो पसंद किए हैं। टिक टॉक प्रतिभा को दुनिया को दिखाने के अलावा कमाई का भी जरिया बन गया है। बहुत से लोग इसके जरिए पैसे भी कमा रहे हैं। हरियाणा के रहने वाले साहिल के टिक-टॉक पर 3,0,3200 फॉलोअर्स हैं।

    उन्होंने बताया कि अपने वीडियो के जरिए हर महीने 3,000-5,000 रुपये तक मिल जाते हैं। साहिल चाहते हैं उनका अकाउंट वेरिफाई हो जाए और उनके फॉलोअर्स 10 लाख तक पहुंच जाएं। बिहार के उमेश अब तक वीगो ऐप पर अपनी कॉमेडी के वीडियो पोस्ट करते हैं उन्हें इसके जरिए हर महीने लगभग 5-10,000 रुपये तक की आमदनी हो जाती है।

    खुद डिलीट नहीं कर सकते टिक-टॉक अकाउंट।
    गूगल प्ले स्टोर पर कहा गया है कि इसे 13 साल से ज्यादा उम्र के लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसका पालन होता नहीं दिखता। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में टिक-टॉक के जरिए जो वीडियो बनाए जाते हैं उसमें एक बड़ी संख्या 13 साल से कम उम्र के लोगों की है। प्राइवेसी के लिहाज से टिक-टॉक खतरों से खाली नहीं है।

    क्योंकि इसमें सिर्फ दो प्राइवेसी सेटिंग की जा सकती है- ‘पब्लिक’ और ‘ओनली’, यानी आप वीडियो देखने वालों में कोई फिल्टर नहीं लगा सकते या तो आपके वीडियो सिर्फ आप देख सकेंगे या फिर हर वो शख्स जिसके पास इंटरनेट है। अगर कोई यूजर अपना टिक-टॉक अकाउंट डिलीट करना चाहता है तो वो खुद से ऐसा नहीं कर सकता। इसके लिए उसे टिक-टॉक से रिक्वेस्ट करनी पड़ती है। इसके अलावा इस तरह के ऐप आपकी निजी जानकारी भी इकट्ठा करते हैं।