मोदी सरकार अंतरिम बजट में बदल सकती है टैक्स रेट

0
328

नई दिल्ली। सरकार पुरानी लीक पर चलते हुए वित्त वर्ष 2020 (FY 2020) के लिए फरवरी में अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश कर सकती है। इस बजट के जरिए सरकार देश को बता सकती है कि उसने लोगों की बेहतरी के लिए कौन से बड़े काम किए हैं और अगले पांच वर्षों के लिए उसका विजन क्या है।

हालांकि सरकार चुनाव से पहले के इस बजट में टैक्स पर कुछ कदम उठाए जाने से इनकार नहीं कर रही है। इसके लिए वह पहले की बातों का हवाला दे रही है, जब इस तरह के बजट में ऐसे कदम उठाए गए थे। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘यह अंतरिम बजट होगा। अभी इस बजट पर चर्चा शुरू नहीं हुई है।’

अंतरिम बजट को लेखानुदान यानी वोट ऑन अकाउंट (Vote on account) भी कहा जाता है। यह फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली के लिए लगातार छठा बजट होगा। बजट पहली फरवरी 2019 को पेश किया जा सकता है।

21 नवंबर को फाइनैंस मिनिस्ट्री (Finance Ministry) ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों (Central Ministries) से जेटली के बजट भाषण (Budget speech) के लिए इनपुट मांगे थे। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि सरकार फरवरी के अंत के बजाय फरवरी की शुरुआत में बजट पेश करने के अपने पिछले निर्णय का लाभ लेते हुए पूर्ण बजट पेश कर सकती है।

हालांकि अधिकारी ने कहा कि ये रिपोर्ट्स सही नहीं हैं। परंपरा यही रही है कि अंतरिम बजट में फोकस निवर्तमान सरकार की उपलब्धियों पर रहता है और भविष्य के बारे में उसकी सोच का खाका पेश किया जाता है। आमतौर पर किसी नई योजना की घोषणा नहीं की जाती है और फाइनैंस बिल के जरिए मौजूदा टैक्स रेट्स को जारी रहने दिया जाता है।

अंतरिम बजट के साथ पेश किए जाने वाले लेखानुदान (Vote on account) से सरकार वित्त वर्ष के एक हिस्से का खर्च चलाने के लिए संसद की मंजूरी लेती है। आमतौर पर यह चार महीने की अवधि के लिए होता है। हालांकि अनुमान आम बजट (General Budget) की तरह पूरे साल के लिए पेश किए जाते हैं।

बाद में बनने वाली नई सरकार चाहे तो इन अनुमानों को पूर्ण बजट में पूरी तरह बदल सकती है। हालांकि अंतरिम बजट में ऐलोकेशन दिखाकर एनडीए सरकार (NDA Government) आने वाले दिनों के लिए अपने इरादे जता सकती है और जिन बातों को वह जरूरी समझे, उनके लिए ज्यादा आवंटन का प्रस्ताव (Allotment proposal) रख सकती है।

अंतरिम बजट (Interim budget) में पिछले साल के टैक्स रेट्स (Tax rates) को अगले वित्त वर्ष के लिए जस का तस रखने की परंपरा रही है, जब तक कि नई सरकार शासन अपना बजट पेश न कर दे। हालांकि अंतरिम बजट में टैक्स के मामले में कदम उठाने के उदाहरण भी हैं।

तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P. Chidambram) ने वित्त वर्ष 2015 के लिए अंतरिम बजट में ऑटोमोबाइल सेक्टर (Automobile sector) के लिए सेंट्रल एक्साइज टैक्स (Central Excise Tax) में कमी की घोषणा की थी।