रिलायंस जियो ने दिखाया पीएम मोदी को ठेंगा, नहीं मानी बात

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नई दिल्ली। पूरे देश के गांवों को ब्रॉडबैंड से कनेक्ट करने की महत्वाकांक्षी योजना को देश की तीन सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों ने बड़ा झटका दिया है। इस योजना के तहत सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए की लागत की निविदाएं मंगाई थीं, जिसके तहत करीब 2.5 लाख गांवों में 12.5 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट लगाए जाने थे।

तीनों बड़ी कंपनियों रिलायंस जियो, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने इस योजना के लिए आवेदन नहीं किया है। सरकार इस योजना के तहत देशभर के गांवों में मुफ्त वाईफाई सेवाएं देने पर विचार कर रही थी।

इसलिए नहीं किया आवेदन
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस काम में कम मुनाफे को देखते हुए कंपनियों ने आवेदन नहीं किया है। इसके अलावा वाईफाई हॉटस्पॉट लगाने के लिए जारी की गई निविदा की तकनीकी दिक्कतों और शर्तों के कारण भी कंपनियों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई है। यह निविदा सरकार के स्वामित्व वाली भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (बीबीएनएल) की ओर से जारी की गई थी।

तकनीकी दिक्कत
एक वरिष्ठ दूरसंचार अधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बीबीएनएल की ओर से जारी की गई निविदा में कहा गया है कि कार्य करने वाली एजेंसी को सार्वजनिक वाईफाई एक्सेस पॉइंट या किसी अन्य उपयुक्त ब्रॉडबैंड तकनीक के माध्यम से 2.5 लाख गांव पंचायतों में अंतिम-मील तक कनेक्टिविटी प्रदान करनी होगी। लेकिन तकनीकी निर्देशों में केवल वाईफाई एक्सेस पॉइंट्स के जरिए सुविधा देने की बात कही गई है।

मार्च तक योजना पूरा करना है 
दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार 2019 के चुनावों से पहले देश के सभी गांवों को ब्रांडबैंड से कनेक्ट करना चाहती है। इसके लिए सरकार ने मार्च 2019 तक की डेडलाइन तय की है। इस योजना के तहत सरकार के स्वामित्व वाली एमटीएनएल, आईटीआई, टेलीकॉम कंसल्टेंट्स इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) ने अपनी निवादाएं जमा की हैं। देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों की ओर से निविदा जमा नहीं करना इस योजना के लिए झटका माना जा रहा है।