मिस्ड कॉल से भी कमाती हैं कंपनियां, जानिए कैसे

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आपने किसी ना किसी को कभी मिस्ड कॉल तो किया ही होगा। कई लोग मिस्ड कॉल से अपना काम चला लेते हैं। इनमें से अधिकतर मोबाइल यूजर्स ग्रामीण इलाके के हैं जो शहर में रह रहे अपने परिजनों से मिस्ड कॉल करके ही बात करते हैं। ऐसे में इन्हें अनलिमिटेड पैक का फायदा नहीं मिल रहा है। आप में से कम ही लोग होंगे जिन्हें पता होगा कि मिस्ड कॉल से भी टेलीकॉम कंपनियों की कमाई होती है? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

आपने (MTC) का नाम शायद ही सुना होगा। इसका पूरा नाम मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज होता है। यानि वह चार्ज जो एक कंपनी अपने नेटवर्क पर आने वाली दूसरी कंपनियों के इनकमिंग कॉल्स के लिए लेती हैं। टेलीकॉम कंपनियों को दूसरे ऑपरेटर के नेटवर्क से आने वाली हर इनकमिंग कॉल पर टर्मिनेशन या इंटरकनेक्शन चार्ज मिलता है।

उदाहरण के लिए यदि आपके पास एयरटेल का सिम कार्ड है और वोडाफोन के नंबर से आपके नंबर पर फोन आ रहा है तो इस कॉल के बदले वोडाफोन एयरटेल को पैसा देगा क्योंकि वोडाफोन के कॉल को एयरटेल ने अपने नेटवर्क पर पूरा किया है।फिलहाल ट्राई ने देश में कॉल के लिए 6 पैसे और अंतरराष्ट्रीय कॉल के लिए 30 पैसे प्रति मिनट का चार्ज तय कर रखा है।

वहीं 2020 तक इसे खत्म करने का भी प्रस्ताव है। इससे पहले हर इनकमिंग कॉल पर 14 पैसे चार्ज लगता था।एक रिपोर्ट की मानें तो देश के तमाम टेलीकॉम ऑपरेटरों ने अपने 50 फीसदी नेटवर्क देश के ग्रामिण इलाकों में स्थापित किए हैं और इनमें से 40 फीसदी नेटवर्क से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई ना के बराबर होती है।

अब सवाल उठता है कि अगर कंपनियों को घाटा हो रहा है तो वे इस पर खर्च क्यों कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण एमटीसी ही है जिससे कंपनियों की कमाई होती है।एमटीसी 14 पैसा से 6 पैसा होने के कारण ही ग्रामिण इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है।

क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि एमटीसी कम होने से उन्हें नुकसान हो रहा है और नुकसान की स्थिति में कोई भी कंपनी निवेश करना क्यों चाहेगी। ऐसे में अनचाहे कॉल्स और मैसेज में भी वृद्धि होगी क्योंकि अपनी लागत निकालने के लिए कंपनियां ऐसा कर सकती हैं।