राजस्‍थान में मतदान शुरू, वसुंधरा के भाग्‍य का फैसला करेगी जनता

0
52

जयपुर।राजस्थान की 199 विधानसभा सीटों के लिए कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शुक्रवार सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हो गया। अलवर जिले की रामगढ़ सीट से बीएसपी उम्मीदवार के निधन से वहां वोटिंग नहीं हो रही है। राजस्थान में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच है। इस चुनाव में जहां कई धुरंधरों का राजनीतिक करियर दांव पर लगा है वहीं कई दिग्गजों की यह आखिरी राजनीतिक लड़ाई साबित हो सकती है।

राजस्‍थान के सियासी दंगल में मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अपनी सत्‍ता बचा पाएंगी या नहीं इसका फैसला आज जनता करेगी। उधर, दिग्‍गज कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिन पायलट बीजेपी को हराकर इतिहास को दोहरा पाएंगे या नहीं, यह देखना बेहद दिलचस्‍प होगा। बता दें कि पिछले 25 साल से यह ट्रेंड रहा है कि हर 5 साल के बाद वहां सत्‍ता बदल जाती है।

यही नहीं लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे इस चुनाव के नतीजों से तीनों ही नेताओं का राजनीतिक भविष्‍य भी तय होगा। अगर इस चुनाव में अगर कांग्रेस को जीत मिलती है तो अशोक गहलोत और सचिन पायलट में सीएम कौन बनेगा, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

इस चुनाव में मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की भी प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी है। राज्‍य बीजेपी के अंदर तमाम विरोध के बाद भी वह लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा है। हालांकि उन्‍हें गहलोत और पायलट की जुगलबंदी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस पार्टी जहां 25 साल से चले आ रहे ट्रेंड और हाल ही में हुए उपचुनावों के परिणामों से बेहद उत्‍साहित है वहीं सत्‍ताधारी बीजेपी ने इस ट्रेंड को तोड़ने के लिए राज्‍य में कड़ी मेहनत की है। बीजेपी ने जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने वरिष्‍ठ नेताओं पीएम मोदी और अमित शाह को चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतार दिया। इस बीच दोनों ही दलों को प्रमुख नेताओं के बीच आपसी सामंजस्‍य न होने के संकट से जूझना पड़ रहा है।

इसके अलावा बागियों ने उनकी समस्‍या को और बढ़ा दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के कई बड़े नेता टिकट नहीं मिलने के बाद या तो निर्दलीय या अपनी पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में हैं। इस विधानसभा चुनाव में राज्‍य के कई दिग्‍गज नेताओं का भाग्‍य दांव पर लगा है। आइए हम कुछ ऐसी हस्तियों के बारे में बता रहे हैं, जिनका राजनीतिक भाग्य इस चुनाव के परिणाम पर टिका है….

झालरपाटन: शाही परिवारों के बीच मुकाबला
1989 में ढोलपुर शाही परिवार की सदस्य मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 400 किमी की दूरी तय करके झालावाड़ से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आई थीं, तब वह बाहरी थीं। अब करीब 29 साल बाद एक और शाही खून और ‘बाहरी’ मानवेंद्र सिंह 700 किमी दूर राजे के गृहनगर बाड़मेर में उन्हें चुनौती देने आए हैं।

अब यह शाही परिवारों के बीच के मुकाबले में बदल गया है। राजे को हर समुदाय के समर्थन मिल रहा है, जिससे वह मजबूत दिख रही हैं। वहीं, मानवेंद्र सिंह चुनाव से ठीक पहले राजे पर निरंकुशता और अपने पिता जसवंत सिंह के अपमान का आरोप लगाकर कांग्रेस में शामिल हो गए। वह इसे अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई बता रहे हैं।