बुवाई के आंकड़े और एक्सपोर्टर की मांग से तय होंगे धनिया के दाम

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  • गुजरात में धनिए की बोवनी सर्वाधिक कम 
  • आंध्र-तेलंगाना में बोवनी नहीं के समान
  • धनिए के स्थान पर सरसों-गेहूं की बोवनी
  • विदेेशी धनिए के भाव बढ़कर 900 डॉलर प्रति टन

मुकेश भाटिया
कोटा।
धनिया उत्पादक राज्य मप्र, राजस्थान एवं गुजरात में बोवनी शुरू हो गई है और दिसम्बर अंत तक समाप्त हो जाएगी। गुजरात में पानी की कमी एवं राजस्थान में किसानों का रुझान सरसों गेहूं की तरफ बताया जा रहा है। मप्र में बोवनी गत वर्ष 1.10 लाख हेक्टेयर के स्थान पर 70 से 75 हजार हेक्टेयर में ही होगी। एकन्दर में बोवनी गत वर्ष से 50 प्रतिशत कम होगी।

विदेशों में धनिए के भाव आसमान छू गए हैं, अत: आयात तो लगभग बंद रहेगा, निर्यात बढ़ जाएगा। संभवत: पूरे विश्व में भारत के धनिए की मांग रहेगी। मनोवृत्ति बदलने से किसान, स्टॉकिस्ट माल रोकने लगे है। इससे तेजी की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। नए वर्ष में धनिया किस भाव पर बिकता है, यह देखना है। फिलहाल निर्यात मांग ठंडी है। दिसम्बर मध्य या जनवरी शुरू होगी।

दिसम्बर अंत में अमेरिका में नए वर्ष का उत्सव शुरू हो जाता है। धनिए की फसल को 3 सिंचाई करना होती है। वायदा कारोबार में मंदी के बावजूद हाजर में भाव नहीं घटे, किंतु ग्राहकी प्रभावित करने में जरूर सफलता मिल जाती है। आंध्र-तेलंगाना में धनिए की बोवनी नहीं के समान हुई है। पिछले ढाई -तीन वर्ष से धनिया उत्पादक एवं स्टॉकिस्टों को घाटा होने से बोवनी के प्रति रुझान घटा है। वर्तमान में धनिए की बेचवाली कम है, जबकि खपत अधिक है।

सरसों के भाव अधिक नहीं गिरते
जानकार क्षेत्रों के अनुसार इस वर्ष वर्षा की कमी से धनिए की बोवनी कम होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। राजस्थान, मप्र एवं गुजरात धनिए के बड़े उत्पादक राज्य है। गुजरात के बड़े भाग में सूखे की स्थिति है। राजस्थान के किसान सरसों एवं गेहूं की बोवनी को प्राथमिकता दे रहे हैं। धनिए की अपेक्षा ये दोनोें फसलें कम जोखिम वाली है।

इसके अलावा पिछले कुछ महीनों से गेहूं के भाव भी अच्छे उपज रहे हैं, और आगे भी अच्छे भाव मिलने के पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है। सरसों के भाव भी धनिए अथवा अन्य जिन्सों के समान पानी-पानी नहीं होते हैं। एक सीमा से अधिक भाव कभी नहीं टूटते हैं। धनिए की बोवनी धीमी गति से चल रही है। दिसम्बर अंत तक बोवनी का कार्य लगभग पूर्ण हो जाएगा। उसके बाद स्पष्ट चित्र नजर आ जाएगा कि कुल कितनी मात्रा में बोवनी हो सकी है।

15 लाख बोरी धनिए का निर्यात
देश में धनिए की खपत 1.10 करोड़ की बताई जाती है। करीब 15 से 20 लाख बोरी का निर्यात होता है। इस वर्ष 35 से 40 हजार बोरी धनिए का केरी ओव्हर स्टॉक रह सकता है। सर्वाधिक उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष भावों को दबाने या खपत कम करने में रोमानिया, बुल्गेरिया, रूस एवं यूक्रेन से आयातित धनिया अपनी अहम् भूमिका निभाते रहे हैं ।

आयातित धनिए में तेल की मात्रा अधिक होने के बाद भी भारतीय बाजारोें में अंतत: खप ही जाता है। इस बार रूस, यूक्रेन में बर्फ अधिक मात्रा में गिरने से धनिए की फसल काफी कमजोर उतरेगी। इस वजह से आयातित धनिए के भाव 350 डॉलर से सुधारकर 900 डॉलर हो गए हैं।

देश में धनिए की शार्टेज होने के बाद भी पूरे विश्व की मांग को भारत के धनिए से आपूर्ति होगी। निर्यातकों ने पिछले दो माह में अच्छी मात्रा मे माल खरीदकर विदेशों को भेज दिया है। अत: एकाध माह निर्यात मांग ठंडी रहेगी। इसी बीच निर्यातक भी फसल का आकलन कर लेंगे।

मनोवृत्ति में बदलाव
किसी भी जिन्स में तेजी-मंदी मनोवृत्ति की अधिक होती है। पिछले तीन वर्ष से धनिए के व्यापारी एवं किसानों को घाटा हो रहा है, अथवा लाभकारी मूल्य नहीं मिलने से भी किसान बोवनी के प्रति अधिक रूचि नहीं ले रहे हैं। धनिए के व्यापार में आम धारणा है कि 999 दिन बाद इसके दिन फिरने लगते हैं। ये दिन पूरे हो गए हैं। अत: अगला पूरा सीजन तेजी का रह सकता है।

पिछले कुछ समय से वायदे में धनिए में लगातार मंदी मारी जा रही थी, किंतु हाजर में भाव उस अनुमान में नहीं घट रहे थे। यह बात अलग है कि लेवाल की मनोवृत्ति पर बुरा असर पड़ता है। एक्सचेंज वालों को तेजी-मंदी जब वायदों में चलती है, तब उसके आधार की तलाश करना चाहिए। यह जगजाहिर है कि धनिए की बोवनी कम होगी, विदेशों में फसल खराब है, आयात संभव नहीं और निर्यात अधिक होगा और घरेलू बाजार में शार्टेज रहेगी।

उसके बाद पिछले दिनों वायदों में मंदी मारी गई। विशेषज्ञों के अनुसार वायदे में एक लाख पर असर होता है, तब हाजर में 10 गुना प्रभाव पड़ता है। भारत में आम खरीददार एवं बेचवाल व्यापारियों की आदत पड़ गई है कि एक कट्‌टा किसी भी जिन्स का खरीदना है और उसके भाव वायदे में चल रहे हैं, तो उसे पहले देखेंगे और बाद में खरीदी करेंगे। यही प्रतिक्रिया हाल ही में एक टीवी चैनल पर राजस्थान के एक प्रमुख व्यापारी ने व्यक्त की है।

दीपावली बाद मांग कम
पिछले दिनों धनिया उत्पादक केंद्रोें पर ग्राहकी कमजोर चल रही थी और वायदे वाले मंदी मार रहे थे। तीन राज्यों में बोवनी शुरू हो चुकी है। दीपावली बाद न केवल धनिए में वरन् अनेक जिन्सोें में मांग समाप्त हो चुकी थी वायदोें में मंदी से खेरची व्यापारी अपनी आवश्यकतानुसार ही माल खरीद रहे थे।

उत्पादक मंडियों में सप्ताह भर में 70 से 75 हजार बोरी की आवक हो रही थी, जबकि प्रति खपत 1.50 से 2 लाख बोरी से कम नहीं मानी जा रही है। धनिए की बोवनी कम होने, निर्यात बढ़ने, बेचवाली घटने से तेजी की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। भावों में कुछ मात्रा में निचले भावोंे से तेजी आ भी चुकी है।

30 से 35 हजार हेक्टेयर में बोवनी होगी 
गत वर्ष गुजरात में 1.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी होने का अनुमान लगाया गया था। इस वर्ष सिर्फ 30 से 35 हजार हेक्टेयर में बोवनी होने की उम्मीद है। गुजरात में पानी की सर्वाधिक दिक्कत है। अभी तक 7 से 8 प्रतिशत बोवनी हो सकी है। राजस्थान में गत वर्ष 1.30 लाख हेक्टेयर में बोवनी की गई थी, इस वर्ष 80 से 90 हजार हेक्टेयर में हो सकती है।

राजस्थान के धनिए उत्पादक क्षेत्रों के खेत गेहूं-सरसों से पटते जा रहे हैं। विशेषकर बारां क्षेत्र। कुछ खेतों में चने की बोवनी भी की गई है। राजस्थान चने की बोवनी के लिए प्रसिद्ध है। सामान्यत: सर्वाधिक चने की बोवनी इसी राज्य में होती आई है। मप्र में गत वर्ष 1.10 लाख हेक्टेयर में धनिए की बोवनी की गई थी, इस वर्ष 70 से 75 हजार हेक्टेयर में होने का अनुमान है। वैसे मप्र के कुछ क्षेत्रोें को छोड़कर सूखे जैसी स्थिति नहीं है।