इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने से कंपनियों की दिवाली गिफ्ट देने में कंजूसी

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नई दिल्ली। इस दिवाली कॉरपोरेट गिफ्ट का बाजार हल्का रहा है और कंपनियों ने एंप्लॉयी और नॉन-एंप्लॉयी दोनों सेगमेंट में गिफ्ट पर हाथ खींचकर पैसे खर्च किए हैं। जहां एक ओर ज्यादातर गिफ्ट आइटमों पर टैक्स रेट का बोझ बढ़ा है, वहीं जीएसटी ऐक्ट में गिफ्ट की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं देते हुए इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित रखा गया है।

इंडस्ट्री मांग कर रही है कि हर गिफ्ट का मकसद किसी न किसी रूप में बिजनस बढ़ाना है। ऐसे में गिफ्ट की खरीद पर दिए गए टैक्स का क्रेडिट मिलना चाहिए। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की इनडायरेक्ट टैक्स कमेटी के चेयरमैन बिमल जैन ने बताया, ‘हम एक साल से मांग कर रहे हैं कि बिजनस गिफ्ट को सेक्शन-16 के तहत बिजनस बढ़ाने के मकसद से की गई सप्लाई के रूप में देखा जाए न कि व्यक्तिगत खर्च के रूप में।

कंपनियां कस्टमर, डीलर, एजेंट्स और अन्य संपर्कों में जो भी गिफ्ट देती हैं, उसका एकमात्र मकसद बिजनस बढ़ाना होता है। यह बिजनस प्रमोशन का हिस्सा है, जिसकी इनपुट में बड़ी हिस्सेदारी हो सकती है।’ जीएसटी के तहत चॉकलेट, स्टेशनरी, होम फर्निशिंग, क्लॉथ, कई एक्सेसरीज पर टैक्स रेट बढ़ने से भी इनकी खरीद महंगी हो चुकी है।

ऐसे में कंपनियों को गिफ्ट पर दोहरी कीमत चुकानी पड़ रही है। जीएसटी कंसल्टेंट राकेश गर्ग कहते हैं कि पिछली टैक्स रिजीम में भी लगभग ऐसे ही प्रावधान थे, लेकिन इनपुट क्रेडिट की सीधे मनाही नहीं थी। जीएसटी में सेक्शन 17 (5) के तहत कुछ सर्विसेज और खर्चों पर इनपुट क्रेडिट ब्लॉक कर दिया गया है, जिसमें गिफ्ट भी है।

एंप्लॉयी या नॉन-एंप्लॉयी के खान-पान या रेस्टोरेंट सर्विसेज पर भी क्रेडिट नहीं मिलता, चाहे वो बिजनेस से ही क्यों न जुड़ा हो। सीए राजीव गुप्ता ने बताया कि जीएसटी ऐक्ट का सेक्शन-16 गुड्स और सर्विसेज की हर उस सप्लाई पर क्रेडिट देता है, जिसका इस्तेमाल बिजनस बढ़ाने में होता है। इसमें जिन गतिविधियों को शामिल किया गया है, उसमें प्रमोशन भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि ऐसे में दिवाली गिफ्ट इनपुट क्रेडिट की योग्यता पर पूरी तरह खरा उतरता है। 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के उपहारों पर जीएसटी चुकाना होगा। अगर कोई कंपनी अपने कर्मचारियों को घर, कार या 50,000 रुपये से ज्यादा मूल्य के उपहार देती है तो वहां इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। गिफ्ट के अलावा फ्री सैंपल या एक के साथ एक फ्री जैसे आइटमों पर भी इनपुट क्रेडिट की मनाही से बाजार में ऐसे ऑफर्स में काफी कमी आई है।