सरकारी नियमों में उलझी उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीद

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कोटा। सरकार ने किसानों का हाथ थामने के लिए उड़द और अन्य फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा तो कर दी लेकिन इससे भी कोई फायदा होता नजर नहीं आ रहा है । क्योंकि सरकारी नियम ऐसे हैं कि सरकारी केंद्रों पर अधिकतर किसानों की जिंस नहीं खरीदी जा रही है। किसान मजबूरी में कम दाम में उड़द की फसल बाजार में बेच रहे हैं।

उड़द का समर्थन मूल्य 5600 रुपए है, लेकिन व्यापारी वही उड़द बाजार में 3500 में खरीद रहे हैं। उधर अधिकारी क्वालिटी खराब बताकर फसलों को नापास कर रहे हैं।

90 हजार मीट्रिक टन उड़द किसानों के घर में
बिन मौसम बरसात ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। हाड़ौती संभाग मेंं उड़द की 2 लाख 20 हजार हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। एक हैक्टेयर में औसत उत्पादन डेढ़ टन माना जाता है। इस  हिसाब से हाड़ौती में लगभग 3 लाख 30 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होना था। लेकिन 60 से 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई।

बची हुई 1 लाख मीट्रिक टन फसल के दाने भी खराब हो गए। सरकार ने प्रदेश में 2.5 लाख मीट्रिक टन उड़द खरीद का लक्ष्य तय किया है। एक किसान से 25 क्विंटल उड़द यानी 2.5 हजार मीट्रिक टन की खरीद होनी है।

हाड़ौती में 22806 किसानों ने खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इन किसानों का उड़द ही 22806 टन (5.70 लाख क्विंटल) बैठता है। हाड़ौती में अभी तक करीब 10 हजार क्विंटल उड़द की खरीद ही हो सकी है।

29 अक्टूबर से दोबारा होगी खरीद
समर्थन मूल्य पर किसानों को 5600 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है, लेकिन मापदंडों पर खरा नहीं उतरने के कारण किसानों को मजबूरन अपनी फसल को 3 हजार से 3500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचनी पड़ रही है। ऐसे में किसान को प्रति क्विंटल ढाई हजार रुपए क्विंटल का नुकसान हो रहा है।