विधानसभा चुनाव: राजस्थान में इस बार होगी क्यू-लेस वोटिंग

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 जयपुर। इस बार मतदाताओं को लाइन में लगे बिना ही वोट डालने की सुविधा देने की कवायद कर ली गई है। क्यू-लेस वोटिंग के लिए मतदाताओं को नंबरों वाला टोकन जारी किया जाएगा।वोट डालने के लिए नंबर आने तक मतदाताओं के बैठने के लिए टेंट या अन्य छायादार व्यवस्था सरकार की ओर से की जाएगी, जहां बैठकर वो अपनी बारी का इंतजार कर सकेगा।

इसके साथ ही छोटे बच्चों को दूध पिलाने माताओं, प्रसूताओं और वरिष्ठजनों को कतार और टोकन से अलग रखते हुए प्राथमिकता से वोट दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। क्यू लेस वोटिंग का प्रयोग इससे पहले कर्नाटक में हो चुका है।

इसी को आधार बनाते हुए राजस्थान में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कवायद हो चुकी है। हाल में निर्वाचन आयोग में चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने एक बैठक में यहां इस पर चर्चा कर इसे लागू करने की सलाह दी। उन्होंने इसे कागजों तक ही सीमित नहीं रखने की भी हिदायत दी।

इसी के अनुसार इस कार्ययोजना को मूर्त रूप से दे दिया गया है। चुनाव विभाग के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद पारीक ने बताया कि नोडल अफसरों के लिए हुई वर्कशॉप में इस बारे में सभी को अवगत करा दिया गया है। इस पर होने वाले खर्च का आकलन किया जा रहा है।

सभी बूथ पर मिलेंगे टोकन : टेंट या छायादार व्यवस्था सभी 51,796 बूथों पर की जाएगी। बूथ पर आने वाले सभी मतदाताओं को वहां तैनात कर्मचारी टोकन जारी करेंगे। इनमें टोकन धारी मतदाताओं को पांच या दस के समूह में आवाज लगाकर वोट डालने के लिए बुलाया जाएगा। यह व्यवस्था इसी क्रम में आगे जारी रहेगी।

प्रसूता और वरिष्ठजनों को छूट : छोटे बच्चों को दूध पिलाने वाली मां, प्रसूता और वरिष्ठजनों को लाइन में लगने या टोकन लेने की जरूरत नहीं होगा। उनको क्रम से अलग हटकर मतदान की सुविधा दी जाएगी। बड़े स्थानों पर महिलाओं के लिए अलग बूथ बनाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को पहले से निर्देश जारी किए हुए हैं।

हर बूथ पर दो-दो वाॅलिंटियर : हर बूथ पर दो-दो वालिंटियर लगाएंगे, जो वरिष्ठजनों या विशेष योग्यजनों को मतदान केंद्र में वोटिंग मशीन तक ले जाने आदि में मदद करेंगे। ये वालिंटियर एनसीसी कैडेट्स या स्काउट गाइड को होंगे। अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं से भी इसके लिए सहयोग लेने पर विचार किया जा रहा है।