ब्याज दरों में कमी नहीं होगी, RBI को महंगाई बढ़ने की आशंका

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मुंबई। पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल के दाम बढ़ने और रुपया कमजोर होने से रिजर्व बैंक को आगे महंगाई बढ़ने का खतरा नजर आ रहा है। इसके बावजूद मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) ने 3 से 5 अक्टूबर की मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। यह बात एमपीसी की बैठक के जारी हुए मिनिट्स में मिनिट्स में सामने आई।  मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी
की अगली मीटिंग 3 से 5 दिसंबर को होगी

मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी मीटिंग के मिनट्स के मुताबिक बैठक में एमपीसी के ज्यादातर सदस्यों का मानना था कि आने वाले समय में महंगाई दर बढ़ने का खतरा है। कीमतों पर दबाव पर और अधिक स्पष्टता के लिए कुछ समय इंतजार किया जाना चाहिए।

समिति के छह से पांच सदस्यों ने रेपो रेट को 6.5% पर बनाए रखने के लिए वोट दिया। इनमें पमी दुआ, रवींद्र ढोलकिया, माइकल देबब्रत पात्रा, विरल आचार्य और उर्जित पटेल शामिल हैं। जबकि एक अन्य सदस्य चेतन घाटे ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया।

बैठक में चेतन घाटे का कहना था कि नीतिगत दरों में पिछली दो बार से हुई बढ़ोतरी के बावजूद, अगस्त से अब तक के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर को 4% पर बरकरार रखना मुश्किल होता जा रहा है। लिहाजा रेपो रेट 0.25% बढ़ाया जाना चाहिए।

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने बैठक में कहा कि महंगाई को लंबे समय तक 4% के दायरे में रखने का लक्ष्य पाने के लिए मौद्रिक नीति के रुख को ‘न्‍यूट्रल’ से ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ की करने की जरूरत है। कैलिब्रेटेड टाइटनिंग का मतलब है कि मौजूदा दरों के चक्र (रेट साइ‍किल) में रेपो रेट में कटौती नहीं होगी और एमपीसी हर बैठक में ब्याज दर बढ़ाने को बाध्य नहीं है।

डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें अधिक बने रहने की आशंका है। इसके मद्देनजर उन्होंने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती से इनकार किया। विरल आचार्य ने कहा कि सभी मौजूदा कारकों और महंगाई दर को लक्ष्य के दायरे में रखने के लिए जरूरी है कि सही समय पर सावधानीपूर्वक आगे बढ़ा जाए।