वन्यजीव मरता है तो आत्मा मरती है- कलेक्टर

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कोटा। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह का समापन रविवार की कोटा जंतुआलय परिसर में पुरस्कार वितरण के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलेक्टर गौरव गोयल ने इस अवसर पर कहा कि जब प्रकृति में किसी वन्यजीव की मौत होती है, तो समझो आत्मा मरती है। गोयल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति प्रकृति के साथ जीता है तो संतुष्टि रहती है।

कलेक्टर  ने  कहा कि  बच्चे जब जंतुआलय में आते हैं तो संतोष का भाव देखने लायक होता है । इतना संतोष तो किसी मॉल में नहीं होता। शहर पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव ने कहा कि वन एवं वन्यजीवों के प्रति जागरूकता से ही वन्यजीव अगली पीढ़ी को देखने को मिलेंगे। दुनिया में संतुलन के लिए 33 प्रतिशत जंगल आवश्यक है। दुर्भाग्य से राज्य में सघन वन मात्र तीन प्रतिशत ही बचा है, जो चिंताजनक है। इसे 33 प्रतिशत पर लाना चाहिए, जो कि निरंतर जागरूकता से ही संभव है।

उपवन संरक्षक सुनील चिद्री ने साप्ताहिक कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा मुकंदरा टाईगर रिजर्व के उप वन संरक्षक टी मोहन राज ने बताया कि टाईगर सफारी में विभिन्न् दिवसों में 500 स्वयंसेवी तथा ग्रामीणों व जन प्रतिनिधियों को बाघ के दर्शन कराए गए। सहायक वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत रंगोली, भाषण, आशु चित्रकला,नारा लेखन, विचित्र वेष भूषा आदि प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

इस बार की चल वैजयंती सेंट्रल एकेडमी शिक्षांतर ने जीती। कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य करने वाने स्वयंसेवी डॉ. सुरभि श्रीवास्तव, जल बिरादरी के बृजेश विजयवर्गीय, तपेश्वर सिंह, नेचर प्रमोटर एएच जैदी, शेर संस्था के डॉ.कृष्णेंद्र सिह, किरण चौधरी, डॉ फातिमा सुल्तान के अलावा वन विभाग के कर्मचरियों को वन रक्षा, अवैध खनन रोकने आदि के लिए पुरस्कृत किया गया। मंच संचालन विजय जोशी ने किया।