केंद्र और राज्यों के लिए पेट्रोल-डीजल सोने का अंडा देने वाली मुर्गी

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दिनेश माहेश्वरी, कोटा। केंद्र और राज्यों के लिए पेट्रोल-डीजल सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है। दोनों ही नहीं चाहते थे कि सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को हलाल करें। वह तो बीच में विधान सभा के चुनाव आ गए, इसलिए सरकारें झुकी और जनता को पेट्रोल – डीजल में मामूल राहत दी। यह राहत उस समय नहीं दी, जब इंटरनेशनल मार्किट में कच्चे तेल की कीमतें घट रही थी। अब चुनाव को देखते हुए जनता का दर्द याद आ गया।

ईंधन की कीमतों में करीब आधा तो केंद्र और राज्यों का टैक्स शामिल होता है। केंद्र पेट्रोल पर 19.48 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलता है। इसके अलावा राज्य सरकारें इस पर 6 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक VAT (मूल्यवर्धित कर) वसूल रही हैं।

केंद्र ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच पेट्रोल-डीजल पर 9 किस्तों में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया है। इस दौरान केंद्र ने पेट्रोल पर प्रति लीटर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाया। खास बात यह है, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिर रही थी।

यानी जब कच्चे तेल की कीमत लगातार गिर रही थी तो केंद्र ने इसका लाभ उपभोक्ताओं को देने के बजाय टैक्स बढ़ाकर कीमतों को ऊंचा रखा और खूब कमाई की। सरकार की दलील थी कि इससे तेल कंपनियों के पिछले घाटों की भरपाई की जा रही है।

4 सालों में दोगुना हुआ केंद्र का एक्साइज कलेक्शन
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी की वजह से पिछले 4 सालों में केंद्र का एक्साइज कलेक्शन दोगुना से भी ज्यादा हो गया। 2014-15 में जहां केंद्र का एक्साइज कलेक्शन 99.184 करोड़ रुपये था, वहीं 2017-18 में यह बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह राज्यों के VAT रेवेन्यू में भी इजाफा हुआ। 2014-15 में राज्यों का वैट रेवेन्यू 1.3 लाख करोड़ रुपये था जो 2017-18 में बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये हो गया।

प्रत्यक्ष कर संग्रह में इजाफा
इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच भारतीयों ने 5.47 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष करों के तौर पर चुकाया है। यह पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही से 17 प्रतिशत ज्यादा है। पर्सनल और कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन भी 19 प्रतिशत बढ़ा है।

जब भारतीय ज्यादा टैक्स जमा करते हैं तो इसका मतलब है कि पहले से ज्यादा लोग (और कंपनियां) टैक्स अदा कर रही हैं और इसका यह भी मतलब है कि वे पहले से ज्यादा कमा रहे हैं। कॉरपोरेट्स द्वारा अडवांस टैक्स जमा में 16 प्रतिशत और लोगों द्वारा अडवांस टैक्स जमा में 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

वित्त मंत्री जेटली ने गुरुवार को यह भी कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में इजाफा से राजकोषीय घाटा को कम करने में मदद मिली है। उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर राहत के लिए इसे भी एक वजह बताई।