गीता गोपीनाथ बनीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की चीफ इकोनॉमिस्ट

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नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) ने भारत में जन्मी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ को चीफ इकोनॉमिस्ट नियुक्त किया है। रघुराम राजन के बाद गीता दूसरी भारतीय अर्थशास्त्री हैं जो इस पद पर नियुक्त हुई हैं। राजन बाद में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने। गोपीनाथ भारत की विदेशी नागरिक हैं।

गोपीनाथ मोरिस ऑब्स्टफ्लेड का स्थान लेंगी जो इस साल के अंत में रिटायर होंगे। वह इस समय हार्वर्ड यूनीवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टडीज व इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर हैं। 2016 के शुरू में उन्हें केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन का वित्तीय सलाहकार नियुक्त किया गया था। उस समय विवाद खड़ा हो गया।

कुछ कम्युनिस्ट नेताओं ने सवाल उठाए थे कि सीपीएम के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया है जो बाजारोन्मुखी और उदार नीतियों से ज्यादा प्रभावित है।नियुक्ति के बाद आइएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीन लैगार्ड ने कहा कि गोपीनाथ दुनिया की उन चुनिंदा अर्थशास्त्रियों में हैं जिनका अंतरराष्ट्रीय पर शानदार कैरियर रहा है।

व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव होने के कारण वह आइएमएफ के रिसर्च विभाग का नेतृत्व करने के लिए एकदम उपयुक्त हैं। कौन हैं गीता गोपीनाथ दिल्ली यूनीवर्सिटी से बीए और एमए की डिग्री हासिल करने के बाद 2001 में गीता गोपीनाथ ने अमेरिका की प्रिंसटन यूनीवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।

उन्होंने यूनीवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से भी पढ़ाई की। उन्होंने 2001 में यूनीवर्सिटी ऑफ शिकागो में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कैरियर शुरू किया। इसके बाद 2005 में वह हार्वर्ड चली गईं। 2010 में वह प्रोफेसर बन गई।

आइएमएफ के बयान के अनुसार अमेरिकी नागरिक गोपीनाथ अमेरिकन इकोनॉमिक रिव्यू की को-एडिटर और नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च के इंटरनेशनल फाइनेंस एंड मैक्रोइकोनॉमिक्स प्रोग्रामर की को-डायरेक्टर भी हैं।