15,053 करोड़ रुपये की नई फसल खरीद नीति को मंजूरी, जानिए क्या है खास

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए  15,053 करोड़ रुपये की नई फसल खरीद पॉलिसी का ऐलान किया। इस पॉलिसी के तहत राज्य सरकारों को एक मुआवजा स्कीम चुनने और खरीद के लिए प्राइवेट एजेंसियों को शामिल करने की मंजूरी दी गई है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ नाम की इस नई पॉलिसी को पीएम की अगुआई में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।

बैठक में शामिल कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने बताया, ‘पीएम-आशा का लक्ष्य किसानों के लिए उनकी फसलों की लाभकारी कीमत सुनिश्चित करना है, जिसके बारे में 2018 के बजट में ऐलान किया गया था। यह एक ऐतिहासिक फैसला है।’

सिंह ने कहा कि पीएम-आशा के तहत राज्यों को कमोडिटी की कीमत उसके न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे जाने की स्थिति में तीन योजनाओं में से एक को चुनने की आजादी होगी। ये योजनाएं हैं- प्राइस सपॉर्ट स्कीम (पीएसएस), हाल में बनी प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (पीडीपीएस) और पायलट ऑफ प्राइवेट प्रोक्योरमेंट स्टॉकिस्ट स्कीम (पीपीएसएस)। राज्य इनमें से किसी भी योजना के तहत कमोडिटी खरीद सकते हैं।

कैबिनेट ने पीएम-आशा को लागू करने के लिए अगले दो वित्त वर्षों में 15,053 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है। इसमें से 6,250 करोड़ रुपये इस साल खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा सरकार ने खरीद एजेंसियों के लिए 16,550 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी गारंटी दी है, जिससे कुल गारंटी बढ़कर 45,550 करोड़ रुपये की हो जाएगी।

सरकार ने कहा कि पीडीपीएस स्कीम मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना की तर्ज पर है, लेकिन यह सिर्फ तिलहन किसानों के लिए सुरक्षा मुहैया कराएगी। पीडीपीएस स्कीम के तहत सरकार किसानों को एमएसपी और थोक बाजार में तिलहन के मंथली एवरेज प्राइस के बीच के अंतर का भुगतान करेगी। यह योजना किसी राज्य में तिलहन के 25 पर्सेंट तक के प्रॉडक्शन पर लागू की जाएगी।