प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति जल्द ही जारी होगी: सुरेश प्रभु

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नई दिल्ली। प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति जल्द जारी की जाएगी। यह घरेलू उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में मदद करेगी। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने दी है। उन्होंने कहा कि ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री (उद्योग) ने इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए सफलतापूर्वक इस लिंक (जुड़ाव) का फायदा उठाया है।

उन्होंने यहां पर कहा, “हम नई औद्योगिक नीति को लेकर आ रहे हैं। हम इसे अंतिम रुप दे रहे हैं। इसमें काफी सारे घटक हैं। इसका सबसे अहम घटक यह है कि आप कैसे इंडस्ट्री को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ते हैं।” नई औद्योगिक नीति 1919 की औद्योगिक नीति की जगह लेगी जिसे भुगतान संतुलन के संकट की पृष्ठभूमि में तैयार किया गया था।

इस प्रस्तावित नीति का उद्देश्य उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देना और मौजूदा उद्योगों का आधुनिकीकरण करना है। यह नियामकीय बाधाओं को भी दूर करने का काम करेगा और रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी उन्नत तकनीक को अपनाने को प्रोत्साहित करेगा।

पिछले साल अगस्त में ही मंत्रालय ने इंडस्ट्रियल पॉलिसी का ड्राफ्ट सामने रखा था जिसका उद्देश्य अगले दो दशकों में रोजगार पैदा करना था। साथ ही इसका मकसद विदेशी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना और सालाना 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करना भी था।

प्रभु ने कहा मंत्रालय ऑटो कंपोनेंट के निर्यात की दिशा में भी सोच रहा है। आगे उन्होंने कहा कि रसद से संबंधित मुद्दों के बाधाओं से निपटने के लिए, मंत्रालय एक योजना तैयार कर रहा है।