रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर, पहली बार 70.50/$ के पार

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नई दिल्ली। रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर लुढ़क गया है। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 70.50 के स्तर के पार हो गया है। कारोबार के दौरान रुपया 42 पैसे टूटकर 70.52 के स्तर पर फिसल गया। यह रुपए का अबतक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 16 अगस्त को डॉलर के मुकाबले रुपया एक समय 70.40 तक टूट गया था जो इसका न्यूनतम स्तर था।

22 पैसे गिरकर खुला रुपया
इससे पहले, बुधवार को रुपए की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे टूटकर 70.32 प्रति डॉलर पर खुला। वहीं मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपए में हल्की रिकवरी देखने को मिली।

रुपया 6 पैसे की बढ़त के साथ 70.10 के स्तर पर बंद हुआ। रुपए की शुरुआत भी बढ़त के साथ हुई थी। डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे की बढ़त के साथ 70.02 के स्तर पर खुला था। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को 26 पैसे टूटकर 70.16 के स्तर पर बंद हुआ था।

रुपए में गिरावट की वजह
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑयल इम्पोर्टर्स और विदेशी बैंकों की तरफ से सरकारी बैंकों द्वारा बिक्री से रुपया गिर गया। इससे पहले 16 अगस्त को रुपया एक समय 70.40 तक टूट गया था जो इसका न्यूनतम स्तर है।

रुपए की ट्रेडिंग रेंज
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपया आज 70.11 से 70.68 की रेंज में ट्रेड कर सकता है।

रुपए में गिरावट का क्या होगा असर

पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा
डॉलर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर हो सकता है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूडआयात करता है। ऐसे में डॉलर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी। इंपोर्ट महंगा होगा तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

बढ़ सकती है महंगाई
देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा। वहीं, एडिबल ऑयल भी महंगे होगे।

साबुन-शैंपू-पेंट्स होंगे महंगे
अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे ये प्रोडेक्ट भी महंगे हो सकते हैं।

ऑटो की बढ़ेंगी कीमतें
ऑटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है। रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

इन सेक्टर को होगा फायदा
रुपए के मुकाबले डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फॉर्मा के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर को होगा। इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है।

ऐसे में डॉलर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा। इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डॉलर में फ्यूल बेचती हैं।