फ्लेक्सी फेयर खत्म करने से रेलमंत्री का साफ इनकार

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नई दिल्ली। रेलमंत्री पीयूष गोयल के फ्लेक्सी फेयर खत्म करने से साफ इनकार करने के बाद अब यह संकेत आ रहे हैं कि फ्लेक्सी फेयर भले ही पूरी तरह से समाप्त न हो लेकिन उसमें कुछ बदलाव करके पैसेंजरों को रिलीफ दिया जा सकता है। रेलवे में पिछले लगभग डेढ़ साल से लगातार फ्लेक्सी फेयर को लेकर बहस चलती आ रही है कि इसे खत्म किया जाए या नहीं।

रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस दिशा में रेलवे विचार कर रहा है कि पैसेंजरों को फ्लेक्सी फेयर के मामले में किस तरह से राहत दी जाए। इसके तहत फ्लेक्सी फेयर प्रणाली में किसी भी तरह का बदलाव किया जा सकता है।

मसलन, अभी जो 10 फीसदी सीटों के टिकट बिकने के बाद 10 फीसदी किराया बढ़ाया जाता है, उसकी बजाय 10 फीसदी की बजाय 20 फीसदी सीटें बिकने के बाद बढ़ोतरी हो सकती है या फिर यह भी हो सकता है कि किराये में दस फीसदी की बजाए पांच फीसदी की भी चरणबद बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा भी कोई फॉर्म्युला लागू किया जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि राहत की यह खबर अगले कुछ दिनों में आ सकती है। उल्लेखनीय है कि फ्लेक्सी फेयर के तहत राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनें आती हैं। इन ट्रेनों में जब एक तय मात्रा में ट्रेन की टिकटें बिक जाती हैं तो उसके बाद हर दस फीसदी टिकटें बिकने के बाद किराए में दस फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है।

गौरतलब है कि फ्लेक्सी फेयर किराया प्रणाली को सितंबर 2016 में लागू किया गया था। पिछले वित्तीय साल में रेलवे को फ्लेक्सी फेयर की वजह से ही लगभग 862 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस प्रणाली को कायम रखने वाले अफसरों का तर्क है कि चूंकि लंबे वक्त से ट्रेनों का किराया नहीं बढ़ाया गया है, ऐसे में फ्लेक्सी फेयर से जो अतिरिक्त कमाई हो रही है, उसे जारी रखा जाए।

उनका यह भी कहना है कि राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों में आमतौर पर मध्य और उच्च मध्य वर्ग के लोग सफर करते हैं, जो इतना किराया अदा कर सकते हैं। लेकिन रेलवे में दूसरे वर्ग का कहना था कि इससे राजधानी, शताब्दी की कुछ क्लास का किराया इतना बढ़ जाता है कि वह हवाई किराए के बराबर चला जाता है, जिससे दीर्घकाल में रेलवे को दिक्कत हो सकती है।