कार सीट सेंसर ड्राइवरों को सोने नहीं देगा, जानिए कैसे ?

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चेन्नई। भारत में कार चलाते वक्त ड्राइवर को झपकी आ जाने की वजह से कई दुर्घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी घटानाओं पर अब काफी हद तक काबू पाया जा सकेगा। दरअसल, आईआईटी मद्रास के कुछ वैज्ञानिकों ने ऐसा कार सीट सेंसर तैयार किया है जो ड्राइवर की ऐक्टिविटीज पर नजर रखेगा। अगर ड्राइवर सुस्त होने लगेगा या वह नींद में आने वाला होगा, ऐसी आशंका पर अलार्म स्वत: ही बज उठेगा। इस अलार्म को वेक अप कॉल भी कहा जा सकता है।

ऐसे काम करेगा अलार्म
ये सेंसर ड्राइवर के हृदय में चलने वाली विद्युतीय गतिविधियों पर बारीक नजर रखेगा। इस प्रोसेस को सीईजीसी यानी कैपेसिटिव इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी कहा जाता है। यह डॉक्टरों के क्लिनिक्स में मिलने वाले ईसीजी से अलग होगा। इन सेंसर्स में इलेक्ट्रोड नहीं होंगे और इनको त्वचा में लगाए रखने की कोई जरूरत नहीं होगी। इसकी बजाए सेंसर्स को कार सीट के फैब्रिक के भीतर लगाया जाएगा।

आईआईटी मद्रास में इंजिनियरिंग डिजाइन डिपार्टमेंट के प्रफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यन के मुताबिक,’दिमाग की हलचल के बारे में जानने के लिए ईसीजी सबसे आसान माध्यम है। किसी इंसान की जागते वक्त की ऐक्टिविटी झपकी लेते वक्त की ऐक्टिविटी से एकदम अलग होती है।’

वेंकटेश बालासुब्रमण्यन तमिल नाडु ऐक्सिडेंट ऐंड इमर्जेंसी इनिशिएटिव के सलाहकार भी हैं। उनके मुतबिक, स्पीड के अलावा ड्राइवर का आलसी हो जाना भी ऐक्सिडेंट होने की आशंकाओं में से एक है। अब हमारे पास इससे निबटने की तकनीक है।

होम डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2018 के बीच 33,026 सड़क हादसे राज्य में हुए। इनमें 6,510 लोगों ने अपनी जान गंवाई तो वहीं 3,044 लोग बुरी तरह घायल हुए।भारत के लिहाज से देखें तो यहां एक वर्ष में यातायात दुर्घटनाओं में तकरीबन 1,50,000 से अधिक मौतें हो जाती हैं।